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उत्तराखंड की शिक्षा और यूसीसी नीतियां देशभर में बन रहीं मॉडल: मनु गौर

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देहरादून, 8 सितंबर (आईएएनएस)। उत्तराखंड समान नागरिक संहिता (यूसीसी) की ड्राफ्टिंग समिति के सदस्य मनु गौर ने अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था में किए गए बदलावों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में लागू किए गए शिक्षा सुधार अब अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन रहे हैं और देश के विभिन्न राज्य इन्हीं नीतियों से प्रेरणा ले रहे हैं।

मनु गौर ने कहा कि उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई कि पश्चिम बंगाल भी एक समान शिक्षा व्यवस्था की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना, जहां यूसीसी लागू किया गया और वह इसकी ड्राफ्टिंग समिति का हिस्सा भी रहे हैं। उनके अनुसार, उसी समय यह अनुमान था कि देवभूमि उत्तराखंड से शुरू हुई यह पहल आगे चलकर देश के अन्य राज्यों को भी प्रभावित करेगी।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण बदलाव किए गए और अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली से जोड़ने का प्रयास किया गया। गौर के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों को भी आधुनिक शिक्षा उपलब्ध हो सके और उन्हें भविष्य में प्रशासनिक सेवाओं, व्यवसाय तथा अन्य पेशेवर क्षेत्रों में आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिलें।

मनु गौर ने कहा कि उस समय से ही उन्हें विश्वास था कि अल्पसंख्यक समाज के बच्चों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने का यह प्रयास व्यापक बदलाव का आधार बनेगा। उन्होंने दावा किया कि उत्तराखंड में शुरू हुई यह प्रक्रिया अब देश के अन्य हिस्सों तक पहुंच रही है, जिससे अधिक विद्यार्थियों को समान अवसर मिल सकेंगे।

यूसीसी को लेकर उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का मॉडल अन्य राज्यों के लिए एक टेंपलेट के रूप में उभरा है। उनके अनुसार, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, असम सहित कई राज्यों में इस विषय पर चर्चा और पहल देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि इन राज्यों में हो रहे प्रयास यह दर्शाते हैं कि उत्तराखंड में लागू की गई व्यवस्था को एक उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है।

मनु गौर ने कहा कि शिक्षा और कानून व्यवस्था से जुड़े इन सुधारों का उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को समान अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में देश के अधिक राज्य इस दिशा में कदम बढ़ाएंगे, जिससे शिक्षा व्यवस्था और अधिक समावेशी तथा आधुनिक बन सकेगी।