उत्तराखंड के पहाड़ों पर महादेव की तपोस्थली, जहां साक्षात नजर आता है ‘ओम’

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पिथौरागढ़, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत प्रकृति की अपार सुंदरता और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा देश है। यहां ऐसी कई अनोखी जगहें हैं, जहां घूमने या दर्शन करने मात्र से मन तरोताजा हो जाता है और भक्ति भाव से भर उठता है। जब बात देवाधिदेव महादेव की होती है, तो देश में उनकी शक्ति और दिव्यता को दिखाने वाली अनेक पवित्र जगहें मौजूद हैं। इन्हीं में से एक अद्भुत स्थान है उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित ओम पर्वत।

उत्तराखंड की देवभूमि में स्थित पिथौरागढ़ जिला न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, बल्कि यहां महादेव की तपोस्थली भी है। पहाड़ों के बीच स्थित एक अनोखा पर्वत, जहां प्रकृति ने खुद ही पवित्र हिंदू प्रतीक ‘ओम’ का भव्य रूप रच दिया है। इसे ओम पर्वत के नाम से जाना जाता है। दूर से देखने पर यह पर्वत बिल्कुल ‘ओम’ के आकार में नजर आता है, जो श्रद्धालुओं के मन में भक्ति और आश्चर्य दोनों भर देता है।

ओम पर्वत हिमालय पर्वतमाला का हिस्सा है और पिथौरागढ़ जिले में स्थित नाभीढांग (नबीधांग) क्षेत्र में 5900 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह पर्वत कृत्रिम नहीं, बल्कि पूरी तरह प्राकृतिक रूप से बना हुआ है।

धार्मिक ग्रंथों में ‘ओम’ की उत्पत्ति का उल्लेख मिलता है। शिव पुराण के अनुसार ‘ओम’ की उत्पत्ति ब्रह्मांड की रचना से पहले हुई थी। पौराणिक मान्यताओं में विश्व के आठ छिपे हुए प्राकृतिक ‘ओम’ प्रतीकों में से एक उत्तराखंड का ओम पर्वत है। हिंदू और बौद्ध दोनों धर्मों में इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है और इसे भगवान शिव का निवास स्थान भी समझा जाता है।

ओम पर्वत कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर पड़ता है। श्रद्धालु नाभीढांग शिविर से इस पर्वत के दर्शन कर सकते हैं। नाभीढांग शिविर पिथौरागढ़ से करीब 170 किलोमीटर दूर स्थित है। यहां से ओम पर्वत साफ दिखाई देता है। यह स्थान आदि कैलाश या छोटा कैलाश के नाम से भी प्रसिद्ध है। श्रद्धालु बताते हैं कि आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन मात्र से मन को असीम शांति और परमानंद की अनुभूति होती है।

अब सवाल है कि महादेव के इस दिव्य स्थान के दर्शन को ओम पर्वत कैसे पहुंचें? इसके लिए सबसे पहले पिथौरागढ़ पहुंचना होता है। यहां से धारचूला होते हुए आगे बढ़ना पड़ता है। धारचूला में एसडीएम कार्यालय से इनर लाइन परमिट लेना अनिवार्य है। इसके बाद टैक्सी से आसानी से नाभीढांग तक पहुंचा जा सकता है। छोटा कैलाश तक पहुंचने के लिए कई रास्ते हैं। नैनी सैनी हवाई अड्डे से स्थल 175 किलोमीटर दूर है। वहीं, काठगोदाम रेलवे स्टेशन से 422 किलोमीटर व सड़क मार्ग से पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय से 178 किलोमीटर दूर है।

श्रद्धालु कहते हैं कि यह यात्रा सिर्फ दर्शन की नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शुद्धि और जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति की यात्रा है। उत्तराखंड को देवभूमि कहे जाने का एक कारण यही पवित्र स्थल भी है। आध्यात्मिक पर्यटन के लिए हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक यहां आते हैं। ओम पर्वत न सिर्फ धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि प्रकृति प्रेमियों और एडवेंचर टूरिस्टों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। दूर-दूर से लोग यहां महादेव की तपोस्थली के दर्शन करने आते हैं। कई लोग मानते हैं कि यहां आकर मन की सारी चिंताएं दूर हो जाती हैं और भक्ति भाव से मन भर जाता है।