चंडीगढ़, 21 अगस्त (आईएएनएस)। वंदे मातरम और ‘वन डे, वन यूनिवर्सिटी’ को लेकर कांग्रेस नेता पवन कुमार बंसल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि 90 वर्षों से दो छंद गाए जा रहे हैं और भाजपा ने अब नाकामियों को छिपाने के लिए विवाद पैदा किया है। बंसल ने आरोप लगाया कि सरकार संसद में हंगामे के बीच बिल पास कराकर लोगों का ध्यान भटका रही है और यूनिवर्सिटी में अपनी विचारधारा थोपने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस नेता पवन कुमार बंसल ने कहा, “90 वर्षों से ये दो छंद गाए जा रहे हैं और उन सालों में जितने भारतीय जनता पार्टी के जितने भी मुख्यमंत्री रहे, गवर्नर रहे हैं, इनकी अपनी सरकारें रही हैं या प्रधानमंत्री रहे हैं, उन्होंने सब जगह पे अलग-अलग समय में अटल बिहारी वाजपेयी से लेके सभी ने इसको उसी तरीके से गाया है। अब भाजपा ने 90 सालों के बाद इसे उठाकर एक विवाद पैदा करने की कोशिश की। ये अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए लोगों का ध्यान भटकाना चाहते हैं। दूसरी तरफ लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए इन्होंने संसद में हंगामे के बीच ये नया बिल (राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026) पास कर दिया।”
उन्होंने आगे कहा कि अब आपको देखने की जरूरत है कि यह क्या चीज है। इसमें दो छंदों का हमने क्यों जिक्र किया और बाकी छंद क्या हैं? यह तकरीबन 1872 और 75 के बीच में 150 साल पहले, इसको बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय जी ने उस वक्त अपनी एक ‘आनंदमठ’ किताब में लिखी थी। 28 दिसंबर 1896 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता (अब कोलकाता) अधिवेशन में सार्वजनिक रूप से ‘वंदे मातरम’ गीत गाया था। उसके बाद कभी-कभी इनको कोई दो छंद गा देते थे, कभी छह गा देते थे।
उन्होंने कहा कि जब आजादी की लड़ाई तेज होती रही, तो कांग्रेस ने 1936 में कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने यह फैसला लिया कि यह जो पहले दो छंद हैं, वो देश को उसकी एक महिमा का जिक्र करते हैं और वो काफी हैं। इसमें किसी धर्म का कुछ नहीं आता। जो दूसरे चार छंद हैं, उसमें मैं भारत माता को मानता हूं, उनकी इज्जत भी करता हूं। उनकी पवित्रता को भी हम रखना चाहते हैं। हिंदू धर्म को छोड़के बाकी सब धर्म उसको नहीं चाहेंगे, क्योंकि वो तो एक धार्मिक अपनी-अपनी विचारधारा आ गई। हमारा धर्मनिरपेक्ष देश है, इसमें अपने-अपने धर्मों को सभी को बराबर की मान्यता है, बराबर का सत्कार है। सरकार की इसमें किसी धर्म की कोई दखलंदाजी नहीं हो। तो उस हिसाब से उस वक्त भी यह सोचा गया था।
उन्होंने कहा कि अब इन्होंने इसे उठाकर बिना वजह एक ऐसा खराब माहौल पैदा कर दिया। हमारी देशभक्ति की तो धज्जियां उड़ा रहे हैं। अब यहां तक सरकार का फैसला है, सरकार अपने कार्यक्रमों में कहीं भी पूरा कुछ भी कर सकती है। हम उसपर कुछ नहीं कर सकते, लेकिन यह कांग्रेस ने कहा कि हम अपने कार्यक्रम में जो दो छंद 90 वर्षों से गाते आ रहे हैं, 1936 से लेकर अब 2026 तक, हम उसको ऐसे ही गाते रहेंगे। ताकि इसमें किसी ढंग का कोई किसी को यह नहीं लगे कि किसी पर हम अपना धर्म दूसरों पर थोप रहे हैं।
‘वन डे, वन यूनिवर्सिटी’ को लेकर कांग्रेस नेता ने कहा कि ये सब जगह आरएसएस के और अपने लोग बिठा देने का एक प्रयास है। हमें जो शिक्षा के केंद्र हैं, उनको अपनी पार्टी की विचारधार से दूर रखने की जरूरत है। अगर आप कोई पार्टी नौजवानों के बीच में बात करना चाहती हैं, तो आपके अपने संगठन हैं। भारतीय जनता पार्टी का अपना है, कांग्रेस का अपना है। कांग्रेस का नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) है। भारतीय जनता पार्टी का एबीवीपी है। आप वहां लोगों को आकर्षित कीजिए, वहां अपने दफ्तरों में उनको बुला लीजिए जो आपके पास आते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि आप यूनिवर्सिटी में, जिसमें सभी विचारों के लोग हैं, उनके बीच में आकर, यूनिवर्सिटी के इंफ्रास्ट्रक्चर में, वहां का ऑडिटोरियम से आप अपने पार्टी की विचारधार का जिक्र करें, वो गलत है। यह दुरुपयोग करना है। हम यहां भी देखते हैं आजकल पंजाब यूनिवर्सिटी में क्या हुआ है। अभी जो दिल्ली में जंतर-मंतर पर हालात हुए, सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा, उसको किसी न किसी ढंग से कवर करने के लिए लोगों का ध्यान बांटने के लिए बातों में लगेंगे।

