Thursday, June 25, 2026
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वायुसेना को मिला स्वदेशी ‘नेत्र’, आसमान से दुश्मन पर रहेगी पैनी नजर

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नई दिल्ली, 25 जून (आईएएनएस)। भारतीय वायुसेना को एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल प्रणाली ‘नेत्र’ के लिए फुल ऑपरेशनल क्लियरेंस- एफओसी प्रदान कर दी गई है। इससे भारतीय वायुसेना की हवाई निगरानी, युद्धक्षेत्र प्रबंधन और दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने की क्षमता और मजबूत होगी।

यह भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। गौरतलब है कि एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (एईडब्ल्यू एंड सी) को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा स्वदेशी स्तर पर विकसित किया गया है। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि बेंगलुरु में 25 जून को आयोजित एक समारोह में वायुसेना के उप प्रमुख एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती की मौजूदगी में यह प्रमाणपत्र सौंपा गया।

इससे पहले वर्ष 2017 में इस प्रणाली को प्रारंभिक परिचालन स्वीकृति (आईओसी) मिली थी। ‘नेत्र’ की बात करें तो यह एक अत्याधुनिक हवाई निगरानी प्रणाली है। इसे विशेष विमान पर स्थापित किया जाता है। यह उड़ान के दौरान सैकड़ों किलोमीटर दूर तक हवाई, समुद्री और जमीनी गतिविधियों पर नजर रख सकती है। इसके जरिए दुश्मन के लड़ाकू विमान, ड्रोन और अन्य खतरों का समय रहते पता लगाया जा सकता है।

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ‘नेत्र’ भारतीय वायुसेना की आंख और कान की तरह काम करता है। यह आसमान में रहकर लगातार निगरानी करता है और कमांड सेंटर को वास्तविक समय में सटीक व जरूरी जानकारी उपलब्ध कराता है। इस प्रणाली की उपयोगिता ऑपरेशन सिंदूर और बालाकोट में साबित हो चुकी है। एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने बताया कि ‘नेत्र’ प्रणाली ने ऑपरेशन सिंदूर और बालाकोट स्ट्राइक जैसे महत्वपूर्ण अभियानों के दौरान अपनी विश्वसनीयता और प्रभावशीलता साबित की है।

उन्होंने कहा कि स्वदेशी तकनीक होने के कारण भारतीय सशस्त्र बल बदलते युद्ध परिदृश्य के अनुसार इसमें आवश्यक सुधार और उन्नयन भी आसानी से कर सकते हैं। इसे डीआरडीओ और वायुसेना की संयुक्त सफलता माना जा रहा है। दरअसल, इस परियोजना को डीआरडीओ, भारतीय वायुसेना और रक्षा उद्योगों के घनिष्ठ सहयोग से विकसित किया गया है। डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने बताया कि इस प्रणाली को विकसित करने के दौरान कई तकनीकी चुनौतियां सामने आईं, लेकिन बेहतर योजना, उन्नत सिस्टम इंजीनियरिंग और व्यापक उड़ान परीक्षणों की बदौलत इसे सफलतापूर्वक परिचालन सेवा के लिए तैयार किया गया।

‘नेत्र’ को पूर्ण परिचालन स्वीकृति मिलना भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक क्षमताओं के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारत अब उन्नत एयरोस्पेस और रक्षा प्रणालियों के विकास में तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है। यह परियोजना वैज्ञानिक संस्थानों, सैन्य बलों और रक्षा उद्योगों के बीच सफल तालमेल का उत्कृष्ट उदाहरण भी है। यह विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को नई मजबूती भी प्रदान करती है।