कोलकाता, 29 अगस्त (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा को लेकर विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) की ओर से दिए गए सुझावों पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता कुणाल घोष ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा बंगाल की धार्मिक परंपरा के साथ-साथ सामाजिक सद्भाव और अर्थव्यवस्था का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। पूजा के धार्मिक स्वरूप का सम्मान करते हुए उत्सव में समाज के सभी वर्गों की भागीदारी बंगाल की विशेषता रही है।
कुणाल घोष ने कहा कि दुर्गा पूजा बेहद संवेदनशील विषय है और इस पर सोच-समझकर बयान दिए जाने चाहिए। बंगाल में सदियों से दुर्गा पूजा होती आ रही है और समय के साथ यह केवल धार्मिक आयोजन न रहकर पूरे समाज का उत्सव बन गया है। पूजा के दौरान खरीदे जाने वाले कपड़ों से लेकर फूल और अन्य सामान तक में अलग-अलग समुदायों के लोग आर्थिक रूप से जुड़े होते हैं।
उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा के पंडालों में सामान्य तौर पर मांसाहारी भोजन नहीं परोसा जाता और इस संबंध में किसी नए निर्देश की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म की अलग-अलग परंपराओं में बलि जैसी प्रथाएं भी रही हैं, इसलिए धार्मिक परंपराओं को लेकर एकतरफा नियम थोपना उचित नहीं होगा।
वीएचपी की ओर से पंडालों में पारंपरिक पूजा और धार्मिक वातावरण बनाए रखने की बात पर घोष ने कहा कि बंगाल में शास्त्रीय और पारंपरिक तरीके से पूजा पहले से होती रही है। इसके साथ ही थीम आधारित पंडाल और कलात्मक सजावट ने दुर्गा पूजा की खूबसूरती को और बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि कई थीम पंडालों में भी पूजा के लिए मां दुर्गा का पारंपरिक स्वरूप रखा जाता है। नई पीढ़ी, कलाकारों और नई कला शैलियों ने पूजा को एक अलग पहचान दी है। बंगाल की दुर्गा पूजा को यूनेस्को से विरासत का दर्जा मिलना भी इसकी व्यापक सांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है।
वीएचपी को लेकर घोष ने कहा कि यदि संगठन के कार्यकर्ता अलग-अलग पूजा समितियों पर यह तय करने का दबाव बनाएंगे कि क्या करना है और क्या नहीं, तो इससे पूजा के दौरान विवाद पैदा हो सकता है। उन्होंने सवाल किया कि दुर्गा पूजा के दौरान केंद्रीय बलों की जरूरत क्यों पड़नी चाहिए और क्यों न पूजा समितियों को अपनी परंपरा के अनुसार आयोजन करने दिया जाए।
दुर्गा पूजा को बंगाल की अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि पूजा के दौरान कपड़े, फूल, सजावट, छोटे कारोबार और बड़े उद्योगों तक आर्थिक गतिविधियां तेज होती हैं। उनके मुताबिक यही कारण है कि इसे केवल एक धार्मिक आयोजन के बजाय व्यापक उत्सव के रूप में भी देखा जाता है।
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को कुणाल घोष ने राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि टीएमसी अदालत के आदेशों का सम्मान करती है और कार्यक्रम के दौरान हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करने का प्रयास किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि भीड़ या किसी अतिरिक्त व्यक्ति के आने की स्थिति को नियंत्रित करना पुलिस की जिम्मेदारी भी है।
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के कार्यालय को लेकर मालिक की ओर से कथित कानूनी नोटिस दिए जाने के सवाल पर घोष ने कहा कि उन्हें इस मामले की पूरी जानकारी नहीं है। उनसे जब कार्यालय के कथित तौर पर बिना कंप्लीशन सर्टिफिकेट (सीसी) के कब्जे में होने की बात पूछी गई, तो उन्होंने कहा कि इस संबंध में संबंधित पक्ष ही बेहतर जानकारी दे सकता है।
तौकीर आलम की हिरासत में कथित मारपीट का मुद्दा उठाते हुए कुणाल घोष ने दावा किया कि आलम को गंभीर चोट आई है और उसे एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घोष ने आरोप लगाया कि हिरासत में लगातार घटनाएं सामने आ रही हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि तौकीर आलम का उचित इलाज सुनिश्चित किया जाना चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि पुलिस हिरासत में रहने के बाद उसे इतनी गंभीर चोट कैसे लगी। उन्होंने मामले में स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए कहा कि हिरासत में किसी व्यक्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी प्रशासन की होती है।
