विदेशी चंदे की चाहत में विपक्षी सांसद कर रहे एफसीआरए का विरोध : प्रियंक कानूनगो

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नई दिल्ली, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (एफसीआरए) 2026 पर विपक्ष द्वारा विरोध जताने पर कड़ी टिप्पणी की है।

प्रियंक ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा है, “विदेशी चंदे की चाहत में भारत की डेमोग्राफी बदलने को आतुर यह माननीय सांसद विदेशी चंदे से धर्मांतरण करने वाली एनजीओ और मिशनरी संस्थाओं के समर्थन में आंदोलन कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की सरकार विदेशी चंदे से धर्मांतरण को रोकने के लिए एफसीआरए कानून में संशोधन कर रही है। कांग्रेस समेत कई पार्टियां इसका विरोध कर रही हैं। यदि इनकी संस्थाएं सही में समाजसेवा कर रही हैं तो फिर 140 करोड़ आबादी वाले भारत के लोग इनको चंदा क्यों नहीं देते?”

संसद के मकर द्वार पर बुधवार को विपक्षी दलों के सांसदों ने विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) संशोधन विधेयक 2026 के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। विपक्षी नेताओं ने इस विधेयक को वापस लेने की मांग करते हुए सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया।

समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह संशोधन विधेयक सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं को नियंत्रित करने का प्रयास है। सरकार चाहती है कि सभी संस्थाएं उसके अनुसार काम करें, इसलिए इस तरह के बदलाव लाए जा रहे हैं। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि यह संविधान के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। यह कानून अनुच्छेद 14, 19, 21 और 301(ए) के खिलाफ है और यह मनमाना व दुर्भावनापूर्ण है। तिवारी ने इस विधेयक का कड़ा विरोध करते हुए इसे लोकतंत्र के लिए खतरा करार दिया।

गौरतलब है कि यह विधेयक 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है। साथ ही, इसके जरिए फंड के दुरुपयोग, विशेषकर जबरन धर्मांतरण और व्यक्तिगत लाभ के मामलों पर रोक लगाई जा सकेगी। हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि यह कानून खास तौर पर अल्पसंख्यक संस्थाओं और गैर-सरकारी संगठनों को निशाना बनाने के लिए लाया गया है।