नई दिल्ली, 15 अगस्त (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री मोदी के सिविल डिफेंस को मजबूत करने वाले बयान पर रक्षा विशेषज्ञ पीके सहगल ने कहा कि उन्होंने पिछले 12 सालों की उपलब्धियों और देश के विजन पर बात की। सहगल ने स्कूल-कॉलेज में बच्चों को सुरक्षा ट्रेनिंग देने और अग्निवीर योजना की सराहना की।
उन्होंने चेतावनी दी कि किसान आंदोलन, शाहीन बाग जैसे प्रदर्शनों को विदेश से फंडिंग मिल रही है और अब एक्यूआईएस के सक्रिय होने से देश के सामने नई चुनौतियां हैं, ऐसे में सिविल डिफेंस को जल्द से जल्द मजबूत करना जरूरी है। सहगल ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर जो भाषण दिया, उसमें उन्होंने किसी दूसरे देश का नाम नहीं लिया, ना ही किसी देश की आलोचना की। उन्होंने साफ तौर पर देश ने पिछले 12 सालों में बड़े पैमाने पर क्या उपलब्धि हासिल की, और देश का भविष्य को लेकर क्या विजन है, इस पर बात की। उन्होंने बात की पिछले 12 सालों में नॉर्थईस्ट में जो इंसर्जेंसी थी, वो खत्म कर दी गई है। नक्सलवाद खत्म कर दिया गया। ये देश के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है।”
पीके सहगल ने कहा कि कई देशों में एक प्रकार से जरूरी मिलिट्री ट्रेनिंग होती है। हमारे देश में जनसंख्या इतनी ज्यादा है कि इसकी जरूरत नहीं है, लेकिन स्कूल और कॉलेजों में हर बच्चे को ट्रेनिंग दी जाए ताकि वह हर तरह से खुद को सुरक्षित रख सके। दुनिया में जिस तरह का माहौल बन रहा है, उसमें किसी को भी कहीं भी खतरा हो सकता है। चाहे आप लड़की हों या लड़का, खुद को सुरक्षित रखने के लिए आपको किसी ना किसी तरह की ट्रेनिंग लेनी चाहिए। इसी को देखते हुए कई स्कूलों में इस तरह के ट्रेनिंग की शुरुआत हो चुकी है। अग्निवीर एक तरह से यही है। चार साल बाद जब अग्निवीर सेवा से बाहर आ जाते हैं, तो वो भी बड़े स्तर पर देश की सेवा करेंगे।
उन्होंने आगे कहा कि दुनिया में हिन्दुस्तान के बहुत बड़े दुश्मन हैं। जितने भी यहां पर विरोध हुए, चाहे वो किसान प्रोटेस्ट हो, शाहीन बाग, या कॉकरोच जनता पार्टी का विरोध हो, ये जितने प्रदर्शन हुए हैं, सबकी फंडिंग विदेश से हुई है। हरीश साल्वे ने एक इंटरव्यू में बताया कि हर साल देश में 23 हजार करोड़ की फंडिंग आ रही है। विदेशी फंडिंग का केवल और केवल एक ही मकसद है, देश को अंदर से बर्बाद करना।
रक्षा विशेषज्ञ ने कहा, “एनआईए की रिपोर्ट की यूएन ने पुष्टि की, जिसमें कहा गया कि लाल किले के पास जो हमला हुआ, वो एक्यूआईएस की तरफ से किया गया। इसने खुद को देश में बड़े पैमाने पर स्थापित करने की कोशिश की, लेकिन उस समय कामयाब नहीं हुए। पहले उनका हमला उस जगह पर हुआ, जहां पूरी दुनिया की नजर थी। पहले आपको एलईटी, जैश-ए-मोहम्मद और खालिस्तानियों से खतरा था, अब एक्यूआईएस का इसके साथ जुड़ना साफतौर पर दिखाता है कि देश में जबरदस्त चुनौती आने वाली है। इन चुनौतियों से बचने के लिए सिविल डिफेंस को मजबूत करना बहुत जरूरी है। ये जितनी जल्दी और जितने बड़े पैमाने पर हो, उतना देश की सुरक्षा और एकता के लिए अच्छा है।”

