नई दिल्ली, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने शनिवार को विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि महिला आरक्षण विधेयक पास हो जाता तो महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व मिल जाता, लेकिन विपक्ष को यह पसंद नहीं था क्योंकि इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और बढ़ जाती। इसी आशंका से विपक्ष ने बिल को पास नहीं होने दिया।
मेघवाल ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “प्रधानमंत्री ने सदन में आकर कहा कि विपक्ष इस बिल का क्रेडिट ले ले, लेकिन इसे पास होने दें। फिर भी विपक्ष ने राजनीतिक कारणों से बिल रोक दिया। महिलाओं के साथ यह बड़ा अन्याय है। बिल पास नहीं होने पर विपक्ष द्वारा सदन में जश्न मनाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। वे महिलाओं के अधिकार को रोकते हैं और फिर कूद-कूदकर नाचते हैं। संसद में ऐसा जश्न मनाना निंदनीय है। देश की महिलाएं इसकी कभी माफी नहीं देंगी और विपक्ष को सबक जरूर सिखाएंगी।”
मंत्री ने आगे कहा कि विपक्ष ने न केवल महिलाओं के अधिकारों को रोका, बल्कि सेना का भी अपमान किया और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को जादू बताकर मजाक उड़ाया।
इसके अलावा केंद्रीय राज्य मंत्री और आरपीआई प्रमुख रामदास आठवले ने भी विपक्ष पर महिलाओं के साथ विश्वासघात करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि मोदी सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक अच्छी पहल लेकर आई थी, लेकिन विपक्ष को लगा कि बिल पास होने से सरकार और मजबूत हो जाएगी। इसी सोच से उन्होंने बिल को हराने की साजिश रची।
आठवले ने कहा, “यह महिलाओं के हितों के साथ बड़ा विश्वासघात है। 2023 में महिला आरक्षण बिल पास हो चुका था। अब विशेष सत्र में परिसीमन संबंधी प्रावधानों के साथ इसे लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही थी, ताकि महिलाओं के लिए सीटें बढ़ाई जा सकें, लेकिन विपक्ष ने इसे रोक दिया।”
संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र में महिला आरक्षण अधिनियम 2023 में संशोधन और परिसीमन बिल पर जोरदार बहस हुई। सरकार ने दावा किया कि बिल से महिलाओं को न्याय मिलेगा और दक्षिणी राज्यों के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा। हालांकि, लोकसभा में मतदान के दौरान बिल को दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका और वह पास नहीं हो पाया।

