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विरोध करने वाले अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग को मिलने वाले आरक्षण को समझ नहीं पा रहे: चिराग पासवान

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पटना, 28 अगस्‍त (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष चिराग पासवान ने कहा कि जो लोग आरक्षण के आकलन की बात करते हैं, वे सही मायनों में आरक्षण और खासतौर पर अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग को मिलने वाले आरक्षण को समझ नहीं पा रहे हैं।

चिराग पासवान ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत के दौरान आरक्षण मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी।

आरक्षण पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा, “जो लोग आरक्षण के आकलन की बात करते हैं, वे सही माइनों में आरक्षण और खासतौर पर अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग को मिलने वाले आरक्षण को समझ नहीं पर रहे हैं। आरक्षण का आकलन करने का मतलब है लोगों को सिस्टम से बाहर करना और इसके दायरे को कम करना। संविधान में हर स्‍तर पर हर तरीके के आरक्षण की व्‍यवस्‍था है। जब आप अनुसूचित जाति और जनजाति में आरक्षण की बात करते हैं तो यहां पर आधार आर्थिक हो ही नहीं सकता है। यह सामाजिक न्याय की लड़ाई है। इसका आधार ही सामाजिक न्‍याय का रहा है।”

उन्‍होंने कहा कि अनुसूचित जाति से आने वाले ये कौन से लोग हैं? ये वो लोग हैं जिनको संविधान ने शेड्यूल किया है, जिनका आधार छुआछूत रहा है, जिनको गांव से दूर रखा जाता था, छूना तो दूर की बात है, देखना पाप माना जाता था। वहीं, शेड्यूल ट्राइब (अनुसूचित जनजाति) का अलग विशेषताएं (वेश-भूषा, रहन-सहन और बोल-चाल) रहे हैं।

चिराग पासवान ने कहा कि इन दो अनुसूचित जाति और जनजाति को शेड्यूल किया गया है, जिसकी वजह से आरक्षण दिया गया है। जब इनको आरक्षण देने का आधार ही भेदभाव रहा है तो इसमें आर्थिक व्‍यवस्‍था कैसे जोड़ी जा सकती है।

उन्‍होंने कहा कि मैं लोगों से पूछना चाहता हूं कि क्‍या आज भेदभाव नहीं होते हैं? कांग्रेस पार्टी के अध्‍यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और माझी के साथ घटनाएं हो रही हैं। आज एकजुट हैं, तब इस वर्ग को इतना संघर्ष करना पड़ रहा है। सोचिए, जब ये बंट कर तीन-चार प्रतिशत रह जाएंगे तो इनकी बात कौन सुनेगा? आज एक हैं तो आवाज बन रहे हैं, बटेंगे को कोई सुनेगा नहीं।

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम पर कहा, “यह अच्छी बात है कि छात्रों की आवाज सुनी जा रही है। मेरी बस यही चिंता है कि छात्रों के मंच का इस्तेमाल राजनीतिक मकसद के लिए नहीं होना चाहिए। अगर आप सच में छात्रों की आवाज बनना चाहते हैं, तो आपको उनके मुद्दे उठाने चाहिए और समाधान खोजने की दिशा में काम करना चाहिए। सिर्फ हंगामा करना काफी नहीं है। बिहार में विपक्ष के नेता को लेकर भी मेरी यही चिंता है। आप जाकर छात्रों से मिले, और यह देखकर मुझे बहुत खुशी हुई। लोकतंत्र की यही खूबसूरती है। जब सत्ता पक्ष और विपक्ष साथ मिलकर आवाज उठाते हैं, तो हम सही समाधान खोजने की दिशा में काम कर सकते हैं।”

उन्‍होंने कहा कि जिसको फैसला लेना है उस मुख्‍यमंत्री से संवाद करो। उनको बताओ क्‍या मांगें हैं। अगर मैं अपनी बात करू तो पहले छात्रों से संवाद किया और उसके बाद सीएम से मुलाकात की। मेरी मुलाकात करने का मकसद सिर्फ समाधान निकालना था। अब काफी हद तक समस्‍याओं का समाधान किया।

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने नेपाल में बाढ़ से राहत कार्यों पर पड़े असर और बिहार पर इसके प्रभाव पर प्रतिक्रिया दी।

चिराग पासवान ने नेपाल में अचानक आई बाढ़ पर कहा, “यह हम सभी के लिए बहुत दुखद घटना है, खासकर इसलिए क्योंकि यह रक्षाबंधन के त्योहार के आसपास हुई। यह उन बहनों के लिए बहुत दर्दनाक है जिन्होंने अपने भाई खो दिए, उन भाइयों के लिए जिन्होंने अपनी बहनें खो दीं, और उन परिवारों के लिए जो बर्बाद हो गए। आज जब मैं अपनी बहनों को शुभकामनाएं दे रहा हूं, तो मेरी संवेदनाएं उन सभी बहनों के साथ हैं जिन्होंने इस त्रासदी में अपने प्रियजनों को खो दिया है। भाइयों ने बहनें खो दीं, बहनों ने भाई खो दिए, और परिवार उजड़ गए।”

उन्‍होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिशा-निर्देश पर हम सब के द्वारा हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। हमारे पड़ोसी देश नेपाल तक हर मदद पहुंचाई जा रही है। इस त्रासदी के दौरान कई भारतीय भी लापता हैं। भारतीयों के लिए हेल्‍प लाइन की शुरूआत हो गई है। मैं प्रार्थना और उम्‍मीद करता हूं कि वहां की स्थिति जल्‍द से जल्‍द सामान्‍य हो।