लखनऊ, 1 जुलाई (आईएएनएस)। शिया धर्मगुरु एवं ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड से जुड़े मौलाना यासूब अब्बास ने कई मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण की अंतिम तिथि समाप्त होने के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा सरकार से समय बढ़ाने की मांग का समर्थन किया।
उन्होंने कहा कि यह मांग पूरी तरह उचित है और ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड भी इसी पक्ष में है। कई वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण अभी तक पूरी तरह नहीं हो पाया है, क्योंकि ऑनलाइन प्रणाली पर रजिस्ट्रेशन सही तरीके से अपलोड नहीं हो रहे हैं। इसके चलते लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मामला वक्फ संपत्तियों के अस्तित्व और संरक्षण से जुड़ा है, इसलिए प्रदेश सरकार को इस प्रक्रिया के लिए अतिरिक्त समय देना चाहिए।
31 हजार से अधिक वक्फ रजिस्ट्रेशन रद्द किए जाने के मुद्दे पर मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि इससे बड़ी संख्या में लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे कई लोग उनके पास भी पहुंचे हैं, जिनके रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिए गए हैं। यह एक सुनियोजित योजना प्रतीत होती है, जिसके तहत वक्फ बोर्ड के जिम्मेदार लोग प्रतिष्ठित वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण रद्द कर रहे हैं और बाद में उन्हें अपने हिसाब से बेचने की कोशिश की जा सकती है।
उत्तराखंड सरकार द्वारा मदरसा बोर्ड को समाप्त किए जाने के फैसले पर भी मौलाना यासूब अब्बास ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह फैसला पूरी तरह गलत है। जिस प्रकार शिशु मंदिरों में धार्मिक शिक्षा दी जाती है, उसी प्रकार मदरसों में भी धार्मिक शिक्षा दी जाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि एक ओर मदरसों को समाप्त किया जा रहा है और दूसरी ओर शिशु मंदिरों को बढ़ावा दिया जा रहा है, तो यह दोहरी नीति है। किसी भी राज्य या देश को दो अलग-अलग नजरियों से नहीं देखा जाना चाहिए।
अयोध्या दान घोटाले के मामले में असदुद्दीन ओवैसी के बयान पर मौलाना यासूब अब्बास ने असहमति जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान देने की आवश्यकता नहीं है। अयोध्या का मामला बेहद गंभीर है और मुख्यमंत्री के स्तर पर और एसआईटी द्वारा इसकी जांच की जा रही है। सरकार इस मामले को गंभीरता से देख रही है, इसलिए बाहरी लोगों को राज्य की आंतरिक राजनीति में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति के बीच हुई टेलीफोन पर बातचीत का मौलाना यासूब अब्बास ने स्वागत किया। उन्होंने इसे सकारात्मक पहल बताते हुए कहा कि भारत और ईरान के संबंध बहुत पुराने और ऐतिहासिक रहे हैं। दोनों देशों के बीच लंबे समय से मित्रतापूर्ण संबंध रहे हैं और प्रधानमंत्री की यह बातचीत द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में अच्छा कदम है। ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से इस पहल का स्वागत किया जाता है।

