कोलकाता, 23 जून (आईएएनएस)। कलकत्ता हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने मंगलवार को उसी कोर्ट की सिंगल-जज बेंच के पिछले आदेश को बरकरार रखा, जिसमें पश्चिम बंगाल के पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास को 17 अगस्त तक पुलिस की सख्त कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा दी गई थी।
यह मामला 13 दिसंबर 2025 को कोलकाता के साल्ट लेक स्थित युवा भारती क्रीड़ांगन में फुटबॉलर लियोनेल मेसी के ‘गोट इंडिया टूर’ इवेंट के दौरान हुई कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। खबरों के मुताबिक, वहां भीड़ को संभालने में दिक्कत के कारण अफरातफरी मच गई थी, जिसके बाद सुरक्षा कारणों से फुटबॉलर को जल्दी वहां से निकलना पड़ा।
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली कैबिनेट में खेल और बिजली मंत्री रहे बिस्वास पर कुप्रबंधन के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगाया गया था, जिसके बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने हाल ही में इस मामले की जांच शुरू की थी।
इसके बाद, बिस्वास ने गिरफ्तारी समेत पुलिस की सख्त कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा पाने के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की सिंगल-जज बेंच का दरवाजा खटखटाया था। 10 जून को जस्टिस भट्टाचार्य की बेंच ने बिस्वास को 17 अगस्त तक अंतरिम सुरक्षा देते हुए कहा था कि पुलिस कानून के मुताबिक जांच जारी रखेगी। इस बीच अगर कोई नोटिस जारी किया जाता है, तो याचिकाकर्ता को जांच एजेंसी के सामने पेश होना होगा।
इसके बाद, पिछले साल मेसी इवेंट के आयोजक शताद्रु दत्ता ने मंगलवार को कलकत्ता हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच का रुख करते हुए बिस्वास को अंतरिम सुरक्षा देने वाले सिंगल-जज वेकेशन बेंच के आदेश को चुनौती दी। मंगलवार को कलकत्ता हाई कोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस तापब्रत चक्रवर्ती और जस्टिस पार्थ सारथी सेन की डिवीजन बेंच में इस मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के आखिर में डिवीजन बेंच ने बिस्वास को 17 अगस्त तक अंतरिम सुरक्षा देने वाले सिंगल-जज बेंच के पिछले आदेश को बरकरार रखने का फैसला किया।
सुनवाई के दौरान, दत्ता के वकील ने कोर्ट में कहा कि भले ही सिंगल-जज बेंच ने पहले बिस्वास को अंतरिम सुरक्षा दी थी, लेकिन उन पर लगे आरोप काफी गंभीर हैं और इसलिए अंतरिम सुरक्षा हटा दी जानी चाहिए।
दत्ता के वकील ने यह भी दावा किया कि इस मामले में पुलिस भी सुस्त पड़ गई है और एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। अपने जवाब में बिस्वास के वकील ने सिंगल-जज बेंच के आदेश को चुनौती देने के लिए दत्ता के अधिकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामले में कोर्ट के एक खास आदेश के बाद, दत्ता को जांच की प्रगति पर सवाल उठाने का कोई हक नहीं था।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, जस्टिस चक्रवर्ती यह जानना चाहते थे कि क्या बिस्वास जांच में सहयोग कर रहे हैं और क्या वे जांच अधिकारी के सामने पेश हो रहे हैं? इसके जवाब में, राज्य के वकील ने कहा कि बिस्वास जांच में सहयोग कर रहे हैं।
इसके बाद, डिवीजन बेंच ने कहा कि सिंगल-जज बेंच ने बिस्वास को 17 अगस्त तक जो सुरक्षा दी थी, वह फिलहाल बनी रहेगी। इस मामले की अगली सुनवाई 2 जुलाई को तय की गई है।

