Sunday, August 23, 2026
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युवाओं के साथ बातचीत सिर्फ राजनीतिक चर्चा तक सीमित नहीं होनी चाहिए: देवेंद्र नाथ महतो

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रांची, 23 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड के छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने रविवार को राजनीतिक दलों को संदेश देते हुए कहा कि युवाओं के साथ संवाद सिर्फ राजनीतिक चर्चा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक को लेकर विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने के बाद महतो ने कहा कि राज्य की भर्ती प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर नया आंदोलन ‘भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा’ सोमवार से शुरू होगा।

हालांकि, पिछला आंदोलन तब वापस ले लिया गया था, जब झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने 11वीं और 13वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) परीक्षाओं और उनके माध्यम से की गई नियुक्तियों को रद्द कर दिया था, लेकिन बाद में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के फैसले पर रोक लगा दी।

देवेंद्र नाथ महतो ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “विरोध प्रदर्शन राज्य के रामगढ़ जिले के नेमरा गांव से शुरू होगा, जो पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत शिबू सोरेन का पैतृक गांव भी है। हमारा एकमात्र लक्ष्य न्याय है, हमें कुछ ठोस कदम चाहिए। हम अब आश्वासनों और संवाद पर रुकने वाले नहीं हैं।”

जब भारतीय जनता पार्टी द्वारा अपने जेन-जी आउटरीच कार्यक्रम के लिए समिति गठित करने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “भाजपा की पहल स्वागतयोग्य है, संवाद होना चाहिए, लेकिन आज का युवा केवल संवाद और सवाल नहीं चाहता, वह ठोस समाधान चाहता है। वह संवाद के माध्यम से जवाब चाहता है कि उसके भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो।”

उन्होंने कहा कि देश भर के युवाओं को पेपर लीक और बेरोजगारी की समस्याओं का समाधान चाहिए। छात्र नेता ने कहा, “संवाद का स्वागत है, लेकिन यह केवल राजनीतिक चर्चा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यह किसी निर्णय तक पहुंचना चाहिए और केवल एक नारा बनकर नहीं रह जाना चाहिए। अगर संवाद के जरिए इस गुस्से को दबाने की कोशिश की गई तो युवा सहमत नहीं होंगे।”

दिल्ली और झारखंड में हुए विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए छात्र नेता ने कहा, “आज का युवा किसी भी राजनीतिक दल के साथ नहीं है, न किसी के पक्ष में है और न ही किसी के खिलाफ। आज का युवा केवल अपने भविष्य और इस सड़ी-गली व्यवस्था को सुधारने के लिए संघर्ष कर रहा है, इसीलिए आंदोलन भाजपा शासित राज्य के साथ-साथ गैर-भाजपा शासित राज्य में भी हुआ।”

उन्होंने जोर देकर कहा, “इसलिए कोई यह नहीं कह सकता कि आज के युवा सत्तारूढ़ दल या विपक्ष के दबाव में या किसी के निर्देश पर अपना आंदोलन कर रहे हैं।”

14 नामजद छात्रों और अन्य के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर प्रतिक्रिया देते हुए महतो ने इसे राज्य सरकार का ‘तानाशाही रवैया’ करार दिया। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि प्रदर्शनकारियों ने घर से निकलने से पहले ही इस बात को स्वीकार कर लिया था कि इस व्यवस्था से लड़ना आसान नहीं होगा।

उन्होंने कहा, “इस भ्रष्ट व्यवस्था को जड़ से उखाड़ना आसान नहीं होने वाला है। इस रास्ते में कई कठिनाइयां आएंगी। एफआईआर, जेल, पुलिस कार्रवाई या हमारे शरीर पर लाठियों के वार, आरोप-प्रत्यारोप, ये संघर्ष के मार्ग का हिस्सा हैं।”

स्वतंत्रता सेनानियों, जिनमें बिरसा मुंडा, भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी और बीआर अंबेडकर शामिल हैं, के संघर्षों की ओर इशारा करते हुए देवेंद्र नाथ महतो ने कहा, “सरकार और प्रशासन को अपना काम करने दीजिए और कानून-व्यवस्था के अनुसार कार्य करने दीजिए। हमें न्यायपालिका और संविधान पर भरोसा है।”