बालाघाट, 23 जून। संयुक्त क्रांति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक किशोर समरीते ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मध्यप्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में हुए कथित 400 करोड़ रुपये के घोटाले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की है।
श्री समरीते ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि प्रदेश में मनरेगा एवं पंचायत विभाग के कार्यों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने दावा किया कि इस कथित घोटाले में प्रदेश के कई जिलों के कलेक्टर, जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ), जनपद पंचायत सीईओ, ग्राम पंचायतों के सरपंच, सचिव और रोजगार सहायकों सहित विभाग के कई अधिकारी शामिल हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विभागीय स्तर पर उच्च पदस्थ अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।
पत्र में श्री समरीते ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में विकास और सुशासन के अनेक कार्य हुए हैं, लेकिन कुछ राज्यों में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की कथित अनियमितताओं के कारण सरकार की छवि प्रभावित हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मध्यप्रदेश में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से जुड़े मामलों में गंभीर वित्तीय गड़बड़ियां सामने आई हैं, जिनकी स्वतंत्र एजेंसी से जांच आवश्यक है।
पूर्व विधायक ने अपने पत्र में मुरैना जिले के ग्राम पंचायत खड़कपुर से जुड़े एक मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि रोजगार सहायक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है। उनके अनुसार यह मामला मनरेगा में कथित फर्जीवाड़े और डिजिटल रिकॉर्ड में हेरफेर की आशंकाओं को उजागर करता है।
श्री समरीते ने आरोप लगाया कि मनरेगा के तहत मजदूरों के फर्जी फोटो और हस्ताक्षरों के आधार पर भुगतान निकाला गया तथा कई स्थानों पर बिना कार्य कराए राशि का आहरण किया गया। उन्होंने कहा कि यह योजना गरीब एवं ग्रामीण श्रमिकों से जुड़ी हुई है, इसलिए इसमें हुई किसी भी प्रकार की अनियमितता अत्यंत गंभीर विषय है।
उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में बड़ी संख्या में प्रशासकीय स्वीकृतियां जारी कर विकास कार्यों के नाम पर राशि खर्च दर्शाई गई, जबकि कई मामलों में कार्यों की वास्तविक स्थिति और भुगतान के बीच गंभीर विसंगतियां देखने को मिली हैं। श्री समरीते ने बालाघाट जिले की बिरसा जनपद पंचायत का उल्लेख करते हुए इसे कथित अनियमितताओं का एक प्रमुख उदाहरण बताया।
अपने पत्र के माध्यम से उन्होंने प्रधानमंत्री से पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की जनता शासन-प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही की अपेक्षा रखती है तथा इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच से ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।



