Monday, August 24, 2026
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मायावती ने की सात राज्यों में पार्टी संगठन की तैयारियों की समीक्षा, बोलीं भाषाई विवाद घातक

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लखनऊ, 13 जुलाई (आईएएनएस)। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने भाषा पर हो रहे विवाद पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि इस पर संज्ञान लेकर लोगों के जानमाल की सुरक्षा करनी चाहिए। बसपा प्रमुख मायावती ने रविवार को राजधानी लखनऊ में सात राज्यों में संगठन के कामकाज की समीक्षा की। वहीं, अन्य सियासी मुद्दों पर चिंतन किया। ये सात राज्य महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल हैं।

बीएसपी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि महाराष्ट्र, तमिलनाडु जैसे राज्यों में भाषा संबंधी विवाद घातक है। उन्होंने कहा कि ऐसा तब होता है जब धर्म, क्षेत्र, जाति और भाषा आदि की संकीर्ण राजनीति लोगों की देशभक्ति व उनके देश प्रेम पर हावी होने लगती है।

उन्होंने कहा कि यह सब तब होता है जब धर्म, क्षेत्र, जाति व भाषा आदि की संकीर्ण राजनीति लोगों की देशभक्ति व उनके देश प्रेम पर हावी होने का प्रयास करती है। हर भारतीय को भारतीयता पर गर्व करके कार्य करना चाहिए। खासकर मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है जहां से देश के सभी राज्यों के लोगों का सीधा वास्ता है तथा उन्हें उनके जान, माल व मजहब के सुरक्षा की गारंटी सरकार को जरूर सुनिश्चित करनी चाहिए। केन्द्र सरकार को भी इसमें जरूर रूचि लेनी चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में पुल व एक्सप्रेस-वे आदि अवस्थापना सुविधाओं में बढ़ रही दुर्घटनाओं व उनमें जान-माल की भारी हानि से देश के किस के प्रति जनता का विश्वास डगमगाता है और सरकारी लापरवाही व भ्रष्टाचार आदि के मामले में उम्मीद को भारी धक्का लगता है। बचाव के हर उपाय जरूर किए जाने चाहिए।

इसके अलावा मायावती ने कहा कि कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी और सरकार के राजनीतिक गुटबाजी से वहां कानून का राज प्रभावित हो रहा है। खासकर गरीब लोगों पर इसका दुष्प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यहां भी धार्मिक उन्माद और जातिवाद लोगों के जीवन को त्रस्त कर रहा है। मायावती के दक्षिण के अन्य राज्यों- तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल की स्थिति पर भी चिंता जताई।

उन्होंने कहा कि बसपा ने उत्तर प्रदेश में अपने चार बार के शासनकाल के दौरान सुशासन की मिसाल कायम की थी।

समीक्षा बैठक में सबसे पहले पार्टी संगठन की कमेटियों के गठन के बारे में दो मार्च को लखनऊ की विशेष बैठक में दिए गए दिशा-निर्देशों की प्रगति रिपोर्ट ली गयी।