बाल, महिला एवं एलजीबीटीक्यू (LGBTQ) के मानसिक स्वास्थ्य और संवैधानिक अधिकारों पर कार्यक्रम आयोजित

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भोपाल : 15 अप्रैल/ सत्यमेव मानसिक विकास केंद्र की निदेशिका स्मिता कुमारी द्वारा आंगनबाड़ी क्रमांक 1146, गोविंदपुरा में “बाल, महिला एवं एलजीबीटीक्यू (LGBTQ) के मानसिक समस्या और उनके संवैधानिक अधिकार” विषय पर एक व्याख्यान का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर के उन कार्यों को याद करते हुए की गई, जिसके तहत उन्होंने संविधान का निर्माण किया। आज इसी संविधान के कारण देश में बालिकाओं एवं महिलाओं के हित में कानून बन रहे हैं, जो उन्हें समाज में समानता का अधिकार दिला रहे हैं।

व्याख्यान में स्मिता कुमारी ने बताया कि मानसिक रूप से समस्या ग्रस्त महिला, दिव्यांग बच्चों या एलजीबीटीक्यू समुदाय के लिए समानता की लड़ाई बहुत कठिन होती है। ऐसे में शोषण से जूझते हुए यह वर्ग हमेशा न्याय के लिए संविधान की ओर ही देखता है, क्योंकि सदियों से चली आ रही मानसिक समस्याओं, दिव्यांगता या लिंग आधारित भेदभाव को चुनौती केवल संवैधानिक रूप से ही दी जा सकती है।

समाज में समानता के साथ जीना हम सबका अधिकार है, लेकिन इस तरह के लोगों का शोषण पहले अपने ही परिजन जागरूकता के अभाव में करते हैं। इसलिए स्मिता कुमारी ने कहा कि वह विभिन्न विषयों पर हर महीने एक निःशुल्क कार्यक्रम का आयोजन कर रही हैं, ताकि समुदाय के लोग समझ सकें कि उनका अधिकार क्या है और परिवार भी जागरूक होकर उनका साथ दे सकें।

उन्होंने बताया कि ऐसे लोगों की लड़ाई सबसे अधिक कठिन तब हो जाती है जब स्वयं का परिवार ही उन्हें नहीं समझता। कई लोग मानसिक दिव्यांग बच्चों, बालिकाओं और LGBTQ समुदाय के लोगों को सबसे पहले जीने का ही अधिकार नहीं देना चाहते। उसके बाद पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य के मामले में उनका शोषण किया जाता है, और उससे भी बढ़कर उनकी संपत्ति में कोई अधिकार देने को कोई तैयार नहीं होता। उन्हें रोजगार से वंचित रखा जाता है अथवा कार्य स्थल पर भी कई बार भावनात्मक, मानसिक एवं शारीरिक रूप से शोषण किया जाता है। ऐसे में संविधान ही एकमात्र रास्ता है जो असमानता और शोषण से लड़ने में मदद करता है।

इसलिए यह कार्यक्रम आयोजित किया गया, ताकि अब तक बने बाल एवं महिला हितैषी कानूनों के प्रति लोग जागरूक हो सकें और मानसिक समस्या से ग्रस्त, दिव्यांगजन अथवा LGBTQ लोगों के साथ समानता का व्यवहार अपनाया जा सके।

कार्यक्रम के अंत में डिप्रेशन और आत्महत्या की रोकथाम पर भी जानकारी दी गई। इस अवसर पर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कई सवाल-जवाब हुए। कार्यक्रम में आंगनवाड़ी की सहायिका निशा तथा लगभग 30 महिलाएँ एवं बच्चे शामिल हुए।