देवास से शुरु हुई दूसरी मालवा महिला कबीर यात्रा का भोपाल में भव्‍य समापन

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भोपाल : 4 जून/ बेगम पुरा सहर को नाव, दूखु अंदोहू नहीं तिहि ठांव, संत रैदास की लिखे इस गीत की प्रस्‍तुति के साथ एकलव्य फाउंडेशन द्वारा आयोजित दूसरी मालवा महिला कबीर यात्रा – धरती की वाणी हेलियों की जुबानी का 4 फरवरी को गांधी भवन भोपाल में भव्‍य समापन हुआ। इस आयोजन में देशभर से आई महिला कलाकारों ने अपनी प्रस्‍तु‍त‍ियाँ दीं। इस यात्रा में देशभर से आए करीब 150 लोगों ने भागीदारी की। यात्रा के दौरान महिला कलाकारों ने सूफी संतों, कबीर, मीरा, संत रैदास, बुल्ले शाह, बाउल आदि की रचनाएँ और अपनी स्वयं की रचनाएँ भी प्रस्‍तुत कीं।

1 फरवरी 2024 को संगीत नगरी, देवास से यह यात्रा शुरू हुई थी और आमला ताज, सोनकच्‍छ, भाऊखेड़ी, सीहोर होते हुए चौथे दिन भोपाल में इसका समापन हुआ। गौरतलब है कि इस यात्रा के दौरान मालवा क्षेत्र के साथ-साथ भारत के अन्य हिस्सों की महिला कलाकार सूफी संतों, कबीर, मीरा, संत रैदास, बुल्ले शाह, बाउल आदि की रचनाएँ और अपनी स्वयं की रचनाएँ भी गाती हैं। इस 4 दिवसीय यात्रा में करीब 150 यात्रियों ने भाग लिया। यात्रा के दौरान हर जगह स्थानीय निवासी भी शामि‍ल हुए। बाहर से यात्रि‍यों के अलावा स्‍थानीय स्‍‍तर पर भी हर दिन 500 लोग एक साथ आए और इस यात्रा का अनुभव किया। इस यात्रा के दौरान हर जगह पर मंच प्राक्रतिक सामग्री से तैयार करते हुए खूबसूरती से सजाया गया था, जो माहौल में एक विशेष एहसास करा रहा था।

इस यात्रा का पहला आयोजन देवास में हुआ। दूसरे और तीसरे दिन सोनकच्‍छ में तत्‍संग का आयोजन हुआ। जगह जगह से आए लोगों ने इस तत्‍संग के दौरान अपने अनुभव साझा किए। स्‍थानीय महिलाओं ने भी इसमें भागीदारी की। उन्‍होंने अपने जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए कबीर गायन के साथ जुड़ाव पर भी बातचीत की। चौथे दिन का तत्‍संग का आयेाजन एकलव्‍य परिसर, भोपाल में हुआ। इस आयोजन में इस चार दिन की यात्रा के अनुभवों को भागीदारों ने साझा किया। साल में एक बार होने वाली इस मालवा महिला कबीर यात्रा के अलावा भी नियम‍ित रूप से आपस में लोग कैसे जुड़कर एक दूसरे के साथ आ सकते हैा इसपर बातचीत हुई।

दूसरे दिन का आयोजन देवास जिले के आमला ताज गांव में हुआ। तीसरे दिन का कार्यक्रम सीहोर के भाऊखेड़ी गांव में आयोजित किया गया। उल्‍लेखनीय है कि एकलव्य अपनी कई पहलों के माध्यम से 1990 के दशक से मालवा क्षेत्र में कबीर गायकों से जुड़ा हुआ है। इसमें स्कूलों में कबीर के साहित्य के माध्यम से जाति और लिंग पर आलोचनात्मक दृष्टिकोण की नींव रखने का प्रयास शामिल है। इन्हीं प्रयासों के क्रम में 2023 में पहली बार महिला कबीर गायकों की यात्रा आयोजित की गई।

समाज, देश, काल और उसमें व्याप्त विरोधाभासों पर गहरी आलोचनात्मक दृष्टि रखने वाले कबीर का साहित्य में ही नहीं बल्कि जनमानस में भी अद्वितीय स्थान है। मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र में कबीर न केवल लोक गायकों के बीच, बल्कि नई दिशा की तलाश करने वालों के बीच भी जीवित हैं। परंपरागत रूप से रोजमर्रा की जिंदगी से लेकर सत्संग तक महिला कलाकार अपनी कला के लिए जगह बनाने के लिए संघर्ष करती रही हैं। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए एकलव्य के मन में यात्रा का विचार आया। और 2023 में पहली और इस साल इस दूसरी महिला मालवा कबीर यात्रा का गांधी भवन भोपाल में समापन हुआ।