Saturday, June 27, 2026
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सोमालीलैंड को मान्यता देने के पीछे क्या है इजरायल की मंशा? मिस्र और जॉर्डन समेत कई देश हुए खफा

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नई दिल्ली, 28 दिसंबर (आईएएनएस)। हॉर्न ऑफ अफ्रीका से अलग हुए सोमालीलैंड को एक अलग राष्ट्र की मान्यता देने का इजरायल का दांव उल्टा पड़ता नजर आ रहा है, हालांकि यूरोपीय यूनियन ने भी सोमालीलैंड को एक देश के रूप में मान्यता दी है, लेकिन अमेरिका और पाकिस्तान समेत 21 देशों ने इजरायल की इस मान्यता को खारिज कर दिया है।

सोमालीलैंड को एक देश के रूप में मान्यता देने के पीछे इजरायल की अपनी रणनीति है। दरअसल लाल सागर और अदन की खाड़ी के करीब स्थित सोमालीलैंड का समर्थन कर इजरायल हूती विद्रोहियों की गतिविधियों पर नजर रखना चाहता है। इजरायल लंबे समय से मिडिल ईस्ट और अफ्रीकी देशों के साथ अपने संबंध सुधारने की कोशिश में लगा है। हालांकि, गाजा में उसके युद्ध ने इस रास्ते को और भी कठिन बना दिया। सोमालीलैंड को मान्यता देने के बाद इजरायल अमेरिका के समर्थन का इंतजार कर रहा है, हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का पहले ही इस पर बयान सामने आ चुका है।

इजरायल लाल सागर में अपनी पैठ बनाना चाहता है और इसके लिए सोमालीलैंड एक सहयोगी के तौर पर उसकी मदद कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इजरायल का सोमालीलैंड को मान्यता देना लाल सागर में भू-राजनीति के आयाम को बदल सकता है। सोमालीलैंड के जरिए इजरायल को बेरबेरा पोर्ट तक डायरेक्ट पहुंच मिल सकती है। ऐसे में लाल सागर में हूतियों के खतरे के बीच ईरानी प्रभाव को कम करने और सुरक्षा बढ़ाने में मजबूती मिल सकती है।

सोमालिया के उत्तर-पश्चिमी हिस्से पर सोमालीलैंड का नियंत्रण है। इसकी सीमा उत्तर-पश्चिम में जिबूती और पश्चिम और दक्षिण में इथियोपिया से लगती है। यमन के सामने लाल सागर के तट पर बसा यह इलाका इजरायल के लिए खास अहमियत रखता है।

अमेरिका का समर्थन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी वाले किसी भी कदम के लिए जरूरी है। इस बीच इजरायल और सोमालीलैंड ने ऐलान किया कि उनके रिश्ते अब्राहम समझौते की भावना के हिसाब से बन रहे हैं। इजरायल के अलावा सोमालीलैंड का सिर्फ ताइवान के साथ आधिकारिक संबंध है। बता दें, ताइवान को भी अब तक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान नहीं मिली है। हालांकि, सोमालीलैंड संयुक्त अरब अमीरात के साथ भी अच्छे और मजबूत संबंध रखता है। यूएई, बेरबेरा पोर्ट में एक सैन्य बेस भी ऑपरेट करता है, जिसमें एक नेवल पोर्ट और फाइटर जेट और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के लिए एक एयरस्ट्रिप शामिल है।

रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों का मानना है कि यह बेस यमन में सना के खिलाफ यूएई के नेतृत्व में चलाए जा रहे अभियान में अहम भूमिका निभाता है। वहीं इथियोपिया ने इस साल की शुरुआत में लाल सागर तक पहुंच पाने के लिए एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग पर हस्ताक्षर किया था, लेकिन पड़ोसी देशों के दबाव में इस एग्रीमेंट को रोक दिया गया था।

वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान, जॉर्डन, मिस्र, अल्जीरिया, कोमोरोस, जिबूती, गाम्बिया, ईरान, इराक, कुवैत, लीबिया, मालदीव, नाइजीरिया, ओमान, फिलिस्तीन, कतर, सऊदी अरब, सोमालिया, सूडान, तुर्किये, यमन और ओआईसी के विदेश मंत्रियों ने संयुक्त बयान जारी कर इजरायल की मान्यता को नकार दिया।