उत्तराखंड : जंगल में लगी आग बुझाने के लिए वायुसेना के हेलीकॉप्टर की ली जा रही मदद, सीएम धामी ने बुलाई समीक्षा बैठक

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पौड़ी, 7 मई (आईएएनएस)। पौड़ी जिले के श्रीनगर सहित कई आसपास के इलाकों में फैली जंगल की आग को बुझाने के लिए वायुसेना के हेलीकॉप्टर एमआई-17 की मदद ली जा रही है।

जंगलों की आग बुझाने के लिए सुबह से ही ऑपरेशन शुरू करना था, लेकिन जंगल की आग से उठे धुँए के कारण विजिबिलिटी बहुत ही कम थी, जिसके कारण वायुसेना के हेलीकॉप्टर एमआई-17 को ऑपरेशन शुरु करने में दिक्कत हो रही थी।

काफी देर बाद वायुसेना के हेलीकॉप्टर एमआई-17 ने जंगल की आग को बुझाने के लिए अपना ऑपरेशन शुरू कर दिया। पौड़ी के अदवाणी में आग बुझाने का काम दोपहर से शुरू हो गया था, जो देर शाम तक जारी रहा।

ऑपरेशन शुरू होने के बाद जिला प्रशासन, वन विभाग समेत स्थानीय लोगों ने चैन की सांस ली है। पौड़ी जिले में अभी तक 150 से ज्यादा ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे 100 हेक्टेयर से ज्यादा का जंगल और लाखों रुपये की वन संपदा जलकर खाक हो चुकी है। इसके साथ ही मंगलवार को भी पौड़ी में जंगल में आग लगने की और 5 घटनाएं हुई हैं, जिनमें अदवाणी का रिजर्व फॉरेस्ट खिर्स का जंगल और पाबौ का जंगल समेत अन्य क्षेत्र में जंगल धू-धू कर जले।

कंडोलिया में जंगल की आग बढ़कर आस-पास के घरों तक पहुंच गई। वन विभाग और फायर ब्रिगेड की टीम ने बड़ी मुश्किल से काबू पाया। साथ ही कंडोलिया से बुआखाल जाने वाली रोड पर नागदेव मंदिर के पास रोड के किनारे मशरूम प्लांट के पास जंगल में आग लग गईजि, जिस पर समय रहते काबू पा लिया गया।

वहीं डीएम आशीष चौहान ने बताया कि आज भी पौड़ी में पांच जगहों परजंगल में आग लगने की घटनाओं को सूचना मिली थी, जिसके बाद उन्हें बुझाने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही अब जंगल की आग बुझाने के लिए वायुसेना के हेलीकॉप्टर एमआई-17 की मदद ली जा रही है।

आग की लगातार बढ़ती घटनाओं को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने सभी चुनावी कार्यक्रमों को रद्द कर दिया है। मुख्यमंत्री धामी ने बुधवार को प्रदेश में जंगल में आग लगने की बढ़ रहीं घटनाओं को लेकर एक हाईलेवल मीटिंग बुलाई है।

मुख्यमंत्री धामी बुधवार को देहरादून में वनाग्नि, पेयजल संकट और चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं पर उच्चस्तरीय बैठक करेंगे। साथ ही सचिवालय में प्रदेश के तमाम क्षेत्रों के जंगलों में लगी आग पर प्रभावी रोकथाम के लिए किए जा रहे कार्यों की समीक्षा करेंगे। साथ ही वनाग्नि की रोकथाम को लेकर तमाम जरूरी दिशा-निर्देश भी अधिकारियों को देंगे।