ईडी ने हैदराबाद नगर निगम के पूर्व अधिकारी से जुड़ी 19 संपत्तियां जब्त कीं

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हैदराबाद, 31 जनवरी (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हैदराबाद क्षेत्रीय कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत लगभग 5.15 करोड़ रुपए मूल्य की 19 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है।

यह जब्ती ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (जीएचएमसी), सर्किल-18वीं, सिकंदराबाद के पूर्व नगर नियोजन अनुभाग अधिकारी दाचा जनार्दन महेश और उनके परिवार के सदस्यों से कथित तौर पर जुड़ी संपत्तियों को लक्षित करती है।

यह कार्रवाई भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) और धारा 13(1)(ई) के तहत हैदराबाद स्थित भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (एसीबी) द्वारा 4 अप्रैल, 2016 को दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर शुरू की गई मनी लॉन्ड्रिंग की चल रही जांच के अंतर्गत आती है।

ईडी ने शनिवार को एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि एफआईआर में महेश पर आय के ज्ञात स्रोतों के सापेक्ष अनुपातहीन संपत्ति रखने का आरोप लगाया गया था। ईडी की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 22 जून, 2022 को हैदराबाद स्थित एसपीई एवं एसीबी मामलों के प्रथम अतिरिक्त विशेष न्यायाधीश के समक्ष आरोप पत्र दाखिल किया गया था।

जांच में यह साबित हुआ कि महेश के पास लगभग 5.27 करोड़ रुपए की संपत्ति थी, जो उनकी वैध आय से कहीं अधिक थी। आगे की जांच में पता चला कि महेश ने अपराध से अर्जित धन का उपयोग करके अपने और अपने रिश्तेदारों के नाम पर कई अचल संपत्तियां—भूखंड, दुकानें, फ्लैट और आवासीय परिसर—हासिल कीं। बताया जाता है कि अवैध धन के स्रोत को छिपाने के लिए इन संपत्तियों को नकद में खरीदा गया था।

महेश और उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में भी बड़ी मात्रा में नकद जमा किया गया था, जिसका उपयोग बाद में संपत्तियां खरीदने और व्यक्तिगत खर्चों के लिए किया गया।

विज्ञप्ति में यह बताया गया कि ईडी की जांच से पता चला कि अपराध से अर्जित धन को महेश ने अपने चचेरे भाई केबी लक्ष्मीनारायण के माध्यम से “श्री इंदिरा सदन” नामक परियोजना के विकास और निर्माण के लिए इस्तेमाल किया था।

जब्त की गई संपत्तियों में महेश और उनके परिवार से संबंधित विभिन्न भूखंड, व्यावसायिक दुकानें, फ्लैट और आवासीय इकाइयां शामिल हैं।