मद्रास हाईकोर्ट में फर्जी शिकायत पर बवाल, एआईएलएजे ने रिश्वत के आरोपों से किया किनारा

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चेन्नई, 16 फरवरी (आईएएनएस)। मद्रास हाई कोर्ट में उस समय विवाद खड़ा हो गया जब ऑल इंडिया लॉयर्स एसोसिएशन फॉर जस्टिस (एआईएलएजे) की तिरुनेलवेली इकाई के नाम से एक कथित फर्जी शिकायत पत्र सामने आया। इस पत्र में एक नामित वरिष्ठ अधिवक्ता पर दो मामलों में अनुकूल आदेश दिलाने के लिए कथित तौर पर 50 लाख रुपये वसूलकर एक मौजूदा न्यायाधीश को रिश्वत देने का आरोप लगाया गया था।

एआईएलएजे के राज्य समन्वयक यू. अधियमान ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल एस. अल्ली को पत्र लिखकर स्पष्ट किया कि संगठन ने न्यायमूर्ति एम. निर्मल कुमार को ऐसा कोई पत्र नहीं भेजा है। उन्होंने कहा कि 15 फरवरी 2026 की अखबारों में प्रकाशित खबरों के जरिए ही संगठन को इस कथित पत्र की जानकारी मिली।

अधियमान ने कहा, “हमने न्यायमूर्ति निर्मल कुमार या किसी अन्य प्राधिकरण को इस तरह का कोई पत्र नहीं भेजा है। हमारी संस्था का इस कथित शिकायत से कोई संबंध नहीं है।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तमिलनाडु में एआईएलएजे की राज्य इकाई तिरुनेलवेली में स्थित है, न कि चेन्नई के थम्बू चेट्टी स्ट्रीट पर, जैसा कि फर्जी लेटरहेड में दर्शाया गया है। संगठन ने यह भी बताया कि उसके यहां “सचिव” का कोई पद नहीं है, जबकि कथित फर्जी दस्तावेज में इस पद का उल्लेख किया गया है। संस्था केवल राज्य समन्वयकों के माध्यम से कार्य करती है।

एआईएलएजे ने इसे संगठन को बदनाम करने और उसकी छवि धूमिल करने की “दुर्भावनापूर्ण कोशिश” बताया। साथ ही कहा कि नाम के दुरुपयोग को लेकर अलग से पुलिस शिकायत दर्ज कराई जाएगी और रजिस्ट्रार जनरल से उचित कार्रवाई की मांग की गई है।

यह मामला तब सामने आया जब न्यायमूर्ति एम. निर्मल कुमार को 12 जनवरी 2026 दिनांकित एक पत्र प्राप्त हुआ, जिसमें दावा किया गया था कि एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने दो वादियों से 50 लाख रुपये लेकर दो आपस में जुड़े मामलों में अनुकूल आदेश दिलाने की बात कही थी। पत्र में न्यायाधीश से इस संबंध में उचित आदेश पारित करने या कार्रवाई करने का अनुरोध भी किया गया था।

इस पत्र की प्रतियां केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय और नई दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय को भी भेजी गई थीं। मंत्रालय ने शिकायत को हाईकोर्ट रजिस्ट्री को अग्रेषित किया, जिसके बाद इसे न्यायमूर्ति निर्मल कुमार के समक्ष रखा गया।

आरोपित वरिष्ठ अधिवक्ता ने इन आरोपों से इनकार करते हुए किसी भी जांच में सहयोग करने की इच्छा जताई है। वहीं सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक के. श्रीनिवासन ने फर्जी प्रतिनिधित्व के पीछे शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायमूर्ति निर्मल कुमार ने संबंधित मामलों की सुनवाई से स्वयं को अलग (रिक्यूज़) कर लिया है और पूरे प्रकरण की सतर्कता (विजिलेंस) जांच के आदेश दिए हैं।