‘मानहानिकारक अभियान बेनकाब’, दिल्ली हाई कोर्ट ने हिमानी पुरी से जुड़े पोस्ट हटाने का दिया आदेश

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नई दिल्ली, 17 मार्च (आईएएनएस)। वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी हिमानी पुरी से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट हटाने का आदेश एक “मानहानिकारक अभियान” के खिलाफ बड़ी “न्यायिक पुष्टि” (विंडिकेशन) है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने हिमानी पुरी को अंतरिम राहत देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स एक्स, गूगल, यूट्यूब, मेटा और लिंक्डइन सहित अज्ञात “जॉन डो” पक्षों को निर्देश दिया कि वे 24 घंटे के भीतर उन सभी पोस्ट और यूआरएल को हटा दें, जिनमें उन्हें अमेरिकी फाइनेंसर और दोषी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जोड़ा गया है।

हिमानी पुरी की ओर से पैरवी कर रहे महेश जेठमलानी ने कहा कि अदालत का यह आदेश स्पष्ट करता है कि ऑनलाइन लगाए गए आरोप बेबुनियाद और दुर्भावनापूर्ण थे, जिनका उद्देश्य उनकी छवि को नुकसान पहुंचाना था।

उन्होंने कहा, “मैं इसे सिर्फ राहत नहीं कहूंगा, यह एक तरह की पुष्टि है। किसी ऐसे व्यक्ति के खिलाफ भ्रामक और आपत्तिजनक अभियान चलाया जा रहा था, जिसका इन आरोपों से कोई लेना-देना नहीं है।”

यह आदेश न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्णा ने उस मानहानि याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जो हिमानी पुरी ने दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि कई ऑनलाइन पोस्ट में झूठा दावा किया गया कि उनका एपस्टीन या उसके नेटवर्क से कोई वित्तीय या अन्य संबंध है, जो पूरी तरह निराधार है।

याचिका में गूगल, एक्स, मेटा और लिंक्डइन जैसे प्लेटफॉर्म्स को न सिर्फ संबंधित पोस्ट हटाने, बल्कि भविष्य में भी ऐसे किसी मानहानिकारक कंटेंट को नोटिस मिलने पर हटाने का निर्देश देने की मांग की गई थी।

हिमानी पुरी ने कंटेंट हटाने के अलावा 10 करोड़ रुपये के हर्जाने और आरोपियों पर स्थायी रोक लगाने की भी मांग की है, ताकि भविष्य में उनके खिलाफ इस तरह की सामग्री प्रकाशित या प्रसारित न हो।

अदालत ने मामले की सुनवाई जारी रहने के दौरान विवादित पोस्ट को तुरंत हटाने का अंतरिम आदेश दिया है। इस मामले में अगली सुनवाई बुधवार को होने की संभावना है।