कोलकाता, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। कलकत्ता हाईकोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी के काम में देरी को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य के भूमि एवं भूमि सुधार विभाग के संयुक्त निदेशक पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया है।
मुख्य न्यायाधीश सुजय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की पीठ ने बुधवार को यह आदेश जारी किया। अदालत ने पाया कि केंद्र सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण के लिए भुगतान किए जाने के बावजूद अब तक जमीन बाड़बंदी के लिए हस्तांतरित नहीं की गई है।
दरअसल, पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा के 128 किलोमीटर हिस्से में कंटीले तार की बाड़ लगाने का काम प्रस्तावित था। इसके लिए केंद्र सरकार ने आवश्यक राशि भी दे दी थी और राज्य सरकार ने जमीन का अधिग्रहण भी कर लिया है, लेकिन अब तक यह जमीन संबंधित एजेंसियों को सौंपी नहीं गई।
राज्य सरकार की रिपोर्ट पर असंतोष जताते हुए हाईकोर्ट ने संयुक्त निदेशक पर व्यक्तिगत रूप से 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने निर्देश दिया कि यह राशि 15 दिनों के भीतर कलकत्ता हाईकोर्ट की लीगल सर्विसेज अथॉरिटी में जमा कराई जाए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पूछा कि आखिर अब तक जमीन क्यों नहीं सौंपी गई। अदालत ने याद दिलाया कि 27 जनवरी को विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई थी, जिसमें 128 किलोमीटर जमीन के हस्तांतरण में देरी के कारण बताने को कहा गया था।
हालांकि, ताजा सुनवाई में विभाग की ओर से केवल 8 किलोमीटर जमीन से संबंधित रिपोर्ट ही पेश की गई, जिस पर अदालत ने नाराजगी जताई और जुर्माना लगाया। साथ ही अगली सुनवाई में पूरी और विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।
गौरतलब है कि इस क्षेत्र में कुल 181 किलोमीटर में बाड़बंदी का काम लंबित है। इसके लिए केंद्र सरकार ने राज्य को आवश्यक धनराशि उपलब्ध करा दी है, लेकिन अब तक सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को जमीन नहीं सौंपी गई है, जिससे काम में देरी हो रही है।

