Tuesday, June 23, 2026
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एनआईए कोर्ट ने डिप्टी कमिश्नर ऑफिस पर खालिस्तानी झंडा फहराने वाले दो आरोपियों को भेजा जेल

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नई दिल्ली, 1 मई (आईएएनएस)। पंजाब के एसएएस नगर (मोहाली) में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने 2020 के एक मामले में दो आरोपियों को दोषी ठहराया है और उन्हें जेल की सज़ा सुनाई है। साथ ही, दोनों आरोपियों पर जुर्माना भी लगाया गया है।

यह मामला पंजाब के मोगा में एक सरकारी इमारत पर खालिस्तानी झंडा फहराने से जुड़ा है, जिसे ‘सिख्स फॉर जस्टिस’ (एसएफजे) के जनरल काउंसल और घोषित आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू के उकसावे पर अंजाम दिया गया था।

आरोपियों की पहचान मोगा के रहने वाले इंदरजीत सिंह और जसपाल सिंह के तौर पर हुई है। उन्हें आईपीसी, यूए(पी) एक्ट और ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम’ की अलग-अलग धाराओं के तहत 5 साल और छह महीने की जेल की सज़ा के साथ ही उन पर 16,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

एनआईए ने इससे पहले इन दोनों के साथ-साथ दो अन्य गिरफ्तार आरोपियों और अमेरिका में रह रहे दो फरार आरोपियों गुरपतवंत सिंह पन्नू और उसके साथी राणा सिंह उर्फ ​​हरप्रीत सिंह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। मोहाली की विशेष अदालत ने 2021 में इस मामले में पन्नू और हरप्रीत (जो एसएफजे का सदस्य है) को ‘घोषित अपराधी’ करार दिया था।

पन्नू के उकसावे पर और एसएफजे (गैरकानूनी संगठन) से नकद इनाम के बदले इंदरजीत और जसपाल ने 14 अगस्त 2020 को मोगा में डिप्टी कमिश्नर के दफ़्तर पर खालिस्तानी झंडा फहराया था। यह घटना स्वतंत्रता दिवस समारोह से ठीक पहले हुई थी। दोनों आरोपी डीसी दफ़्तर के प्रशासनिक परिसर में घुसे और इमारत की छत पर चले गए, जहां उन्होंने एक लोहे के खंभे पर केसरिया/पीले रंग का झंडा फहराया, जिस पर ‘खालिस्तान’ शब्द छपा हुआ था। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय ध्वज की रस्सी काटकर उसका अपमान भी किया, जिससे तिरंगा ज़मीन पर गिर गया। इसके बाद उन्होंने रस्सी पकड़कर तिरंगे को जमीन पर घसीटा।

इस मामले की जांच के दौरान पता चला कि हरप्रीत ने इन हरकतों को अंजाम देने के लिए इंदरजीत और जसपाल को पैसे दिए थे। पनून ने इससे पहले, 10 और 11 अगस्त 2020 के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड किया था जिसमें उसने पंजाब और हरियाणा के निवासियों से खालिस्तानी झंडे फहराने की अपील की थी। उसने तो यहां तक घोषणा की थी कि जो भी भारतीय युवा दिल्ली के लाल किले पर खालिस्तानी झंडा फहराएगा, उसे 125,000 अमेरिकी डॉलर का इनाम दिया जाएगा और किसी भी सरकारी दफ़्तर पर ऐसा झंडा फहराने के लिए 2,500 अमेरिकी डॉलर का इनाम दिया जाएगा।