रांची, 4 मई (आईएएनएस)। झारखंड प्रदेश कांग्रेस की नई कमेटी की घोषणा के चौबीस घंटे के भीतर ही पार्टी में आंतरिक कलह खुलकर सामने आ गई है। राज्य सरकार में कांग्रेस कोटे के वरिष्ठ मंत्री और कद्दावर नेता राधाकृष्ण किशोर ने नवगठित कमेटी के ढांचे और नेतृत्व की कार्यशैली पर तीखा हमला बोला है।
उन्होंने सोशल मीडिया पर झारखंड कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के. राजू को सीधे संबोधित करते हुए पार्टी की वर्तमान स्थिति को “एक आंख में सुरमा और दूसरी में काजल” लगाने जैसा पक्षपातपूर्ण करार दिया है। राधाकृष्ण किशोर ने संगठन में अपनाए जा रहे ‘दोहरे मापदंडों’ पर सवाल उठाते हुए दो प्रमुख उदाहरण पेश किए हैं।
उन्होंने बड़कागांव क्षेत्र के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के निष्कासन पर नाराजगी जताते हुए पूछा है कि उनका क्या दोष था कि उन्हें तीन साल के लिए पार्टी से बाहर कर दिया गया। वहीं दूसरी ओर, उन्होंने रांची की पूर्व मेयर रमा खलखो का नाम लेते हुए आपत्ति दर्ज की कि जिस नेता ने सार्वजनिक रूप से कांग्रेस और आलाकमान को कोसा, उन्हें ही नई चुनाव प्रबंधन समिति में महत्वपूर्ण सदस्य बना दिया गया है।
किशोर के अनुसार, निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी और विरोधियों को पुरस्कृत करने की यह नीति पार्टी के लिए घातक है। रविवार को घोषित हुई 200 से अधिक पदाधिकारियों वाली भारी-भरकम सूची पर तंज कसते हुए उन्होंने इसे ‘जंबो-जेट’ समिति करार दिया है।
उन्होंने सवाल उठाया कि 81 विधानसभा सीटों वाले राज्य के लिए 314 सदस्यों की इतनी विशाल फौज कितनी कारगर होगी, यह समय ही बताएगा। उन्होंने पार्टी नेतृत्व को नसीहत दी है कि देश के हालिया चुनावी परिणामों से सबक लेने के बजाय झारखंड कांग्रेस केवल भीड़ जुटाने में व्यस्त है।
मंत्री ने सीधे तौर पर प्रदेश नेतृत्व के ढांचे में बदलाव की वकालत की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक प्रदेश नेतृत्व के बारे में कोई ठोस और बुनियादी फैसला नहीं लिया जाता, तब तक संगठन की मजबूती की कल्पना करना व्यर्थ है। राधाकृष्ण किशोर जैसे वरिष्ठ नेता के इस सार्वजनिक विद्रोह ने कांग्रेस के भीतर मचे घमासान को और हवा दे दी है। उनके इस रुख को झारखंड कांग्रेस में बड़े कलह के आगाज के रूप में देखा जा रहा है।

