बरेली : 03 मई / बरेली शरीफ के उर्स से लौट रहे बिहार के किशनगंज निवासी प्रतिष्ठित धार्मिक व्यक्तित्व मौलाना तौसीफ़ रज़ा मजहरी (30) की ट्रेन में निर्मम मारपीट के बाद चलती ट्रेन से धक्का देकर हत्या कर दी गई। इस मामले में रेलवे प्रशासन, विशेषकर डीआरएम बरेली की घोर लापरवाही सामने आई है। मध्य प्रदेश के बैतूल जिला एवं सत्र न्यायालय के अधिवक्ता दीपक बुंदेले ने रेल मंत्री को एक विस्तृत शिकायत पत्र भेजकर डीआरएम को निलंबित करने, CBI जाँच और परिवार को मुआवजा देने की माँग की है।
26 अप्रैल 2026 की शाम को मौलाना साहब ट्रेन संख्या 04314 (बरेली से किशनगंज) के एक जनरल डिब्बे में सवार थे। उर्स के कारण डिब्बे में अत्यधिक भीड़ थी। रात करीब 9:30 बजे कुछ नशे में धुत असामाजिक तत्वों ने उन्हें धार्मिक पहचान के आधार पर गालियाँ देनी, मारपीट और लूटपाट शुरू कर दी।
पीड़ित ने अपनी पत्नी को फोन कर आखिरी बार बताया – “मेरे साथ मारपीट हो रही है, जान से मारने की धमकी दे रहे हैं।” पत्नी ने तुरंत रेलवे हेल्पलाइन 139 और GRP बरेली को सूचित किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। रात 10 बजे के आसपास आरोपियों ने मौलाना को चलती ट्रेन के दरवाजे से नीचे फेंक दिया।
27 अप्रैल 2026 को सुबह बरेली कैंट स्टेशन के पास ट्रैक के किनारे उनका क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर कई गहरी चोटों, हड्डियों के टूटने और सिर पर गंभीर प्रहार के निशान पाए गए।
अधिवक्ता दीपक बुंदेले ने रेल मंत्री को पत्र लिखकर डीआरएम बरेली को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। पत्र के अनुसार:
– जनरल डिब्बे में न तो RPF था, न GRP, न ही टीटीई।
– सीसीटीवी निगरानी का पूर्ण अभाव।
– हेल्पलाइन 139 और GRP ने त्वरित कार्रवाई नहीं की।
– उर्स जैसे आयोजन में भीड़ के मानकों को नजरअंदाज करना डीआरएम की व्यवस्थागत विफलता है।
शिकायत में कहा गया है – “यह घटना संयोग नहीं, बल्कि रेलवे प्रशासन की घोर लापरवाही का परिणाम है। डीआरएम, बरेली को तत्काल निलंबित कर विभागीय जाँच होनी चाहिए।”
अधिवक्ता बुंदेले ने रेल मंत्री से निम्नलिखित कार्रवाई की माँग की है:
1 – CBI या स्वतंत्र एजेंसी से उच्चस्तरीय जाँच कराई जाए।
2 – डीआरएम बरेली सहित सभी लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई (निलंबन तक) की जाए।
3 – पीड़ित परिवार को ₹1 करोड़ का मुआवजा, आश्रित को नौकरी और मासिक पेंशन दी जाए।
4 – सभी जनरल डिब्बों में RPF तैनाती, सीसीटीवी, पैनिक बटन और GPS आधारित अलर्ट सिस्टम लगाया जाए।
5 – आरोपियों को 7 दिनों के भीतर गिरफ्तार कर सख्त से सख्त सजा दिलाई जाए।
अब तक रेलवे प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। डीआरएम बरेली कार्यालय से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। हालाँकि सूत्रों के अनुसार RPF ने घटना की जाँच शुरू कर दी है, लेकिन कार्रवाई की धीमी रफ्तार पर सवाल उठ रहे हैं।
इस घटना ने पूरे देश में रेल यात्रियों, खासकर साधारण डिब्बों में यात्रा करने वाले लाखों लोगों में दहशत पैदा कर दी है। अधिवक्ता दीपक बुंदेले ने रेल मंत्री से 7 दिनों के भीतर लिखित कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) और गृह मंत्रालय को भी इस मामले की प्रतिलिपि भेजी है।


