Thursday, June 25, 2026
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केनरा बैंक फ्रॉड केस : ईडी ने छह ठिकानों पर मारे छापे, करोड़ों की गड़बड़ी उजागर

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नई दिल्‍ली, 8 मई (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गोवा में एक बड़े बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में व्यापक कार्रवाई करते हुए छह स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई केनरा बैंक से कथित रूप से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी से जुड़ी कंपनी क्राउन मिनरल ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन (सीएमटीसी) और उसके साझेदारों के खिलाफ की गई।

ईडी के पणजी जोनल कार्यालय द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई इस कार्रवाई के दौरान 67.50 लाख रुपये नकद, संपत्ति की बिक्री से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज और कई डिजिटल उपकरण जब्त किए गए।

ईडी ने इस मामले में जांच की शुरुआत केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की एंटी करप्शन ब्रांच (एसीबी), गोवा द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर की थी। यह एफआईआर केनरा बैंक की शिकायत पर दर्ज हुई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सीएमटीसी के साझेदारों ने फर्जी दस्तावेजों और धोखाधड़ी के जरिए बैंक की मडगांव शाखा से 7 करोड़ रुपये की क्रेडिट सुविधा हासिल की।

शिकायत के अनुसार, कंपनी खुद को कच्चे लौह अयस्क के व्यापार से जुड़ी फर्म बताती थी, लेकिन बाद में सामने आया कि उसका कोई वास्तविक कारोबारी संचालन नहीं था।

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि बैंक से प्राप्त ऋण राशि को व्यापारिक गतिविधियों में लगाने के बजाय साझेदारों के निजी बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया गया।

इसके अलावा, कैश क्रेडिट सीमा के नवीनीकरण और उसे जारी रखने के लिए बैंक को फर्जी वार्षिक स्टॉक विवरण जमा किए गए थे। ऋण चुकाने में विफल रहने के बाद बैंक खाते को ‘नॉन-परफॉर्मिंग एसेट’ (एनपीए) घोषित कर दिया गया, जिस पर करीब 6.19 करोड़ रुपये बकाया पाए गए।

ईडी की जांच में एक और बड़ा खुलासा यह हुआ कि जिन संपत्तियों को केनरा बैंक के पास गिरवी रखा गया था, उन्हीं संपत्तियों को एक ही समय में कई अन्य बैंकों के पास भी गिरवी रखकर अतिरिक्त ऋण हासिल किए गए। इनमें सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, कर्नाटक बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और मडगांव अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक शामिल हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, इस तरीके से आरोपियों ने करीब 10.02 करोड़ रुपये के अतिरिक्त ऋण हासिल किए।

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने एक आपराधिक साजिश के तहत उन्हीं संपत्तियों के लिए कई बिक्री विलेख तैयार किए और अलग-अलग बैंकों को इन दस्तावेजों के अलग-अलग सेट जमा किए।

ईडी का कहना है कि इस प्रक्रिया के जरिए अपराध से अर्जित धन को छिपाने, उसका स्वरूप बदलने और उसे वैध संपत्ति के रूप में पेश करने का प्रयास किया गया।

इस मामले में इससे पहले भी ईडी ने कार्रवाई करते हुए पीएमएलए के तहत सीएमटीसी के साझेदारों से जुड़ी लगभग 2.86 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था।