2047 तक भारतीय अर्थव्यवस्था में अतिरिक्त 500 अरब डॉलर का योगदान दे सकता है खनन क्षेत्र: रिपोर्ट

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    नई दिल्ली, 9 मई (आईएएनएस)। एक रिपोर्ट के अनुसार, यदि भारत का खनन उद्योग आधुनिक तकनीकों और टिकाऊ खनन तरीकों को तेजी से अपनाता है तो यह 2047 तक देश की अर्थव्यवस्था में अतिरिक्त 500 अरब डॉलर का योगदान दे सकता है और करीब 2.5 करोड़ नई नौकरियां पैदा कर सकता है।

    डेलॉयट और इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईसीसी) की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, तेजी से बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों और विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार के कारण खनिजों की मांग बढ़ रही है, जिससे भारत का खनन क्षेत्र बड़े बदलाव के दौर में प्रवेश कर रहा है।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में खनन उद्योग अहम भूमिका निभा सकता है।

    फिलहाल खनन क्षेत्र का भारत की जीडीपी में सीधा योगदान करीब 2 से 3 प्रतिशत है। साथ ही यह इस्पात, सीमेंट, ऑटोमोबाइल, बिजली और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे प्रमुख उद्योगों को भी समर्थन देता है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का खनन क्षेत्र अब ‘माइनिंग 4.0’ से आगे बढ़कर ‘माइनिंग 5.0’ मॉडल की ओर बढ़ रहा है।

    ‘माइनिंग 4.0’ मुख्य रूप से ऑटोमेशन और डिजिटल तकनीकों पर आधारित था, जबकि ‘माइनिंग 5.0’ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), एडवांस एनालिटिक्स, डिजिटल ट्विन और आपस में जुड़े ऑपरेशनल सिस्टम का इस्तेमाल होगा।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘माइनिंग 5.0’ पारंपरिक खनन मॉडल से हटकर तकनीक-आधारित, टिकाऊ और ज्यादा मूल्य देने वाले खनन सिस्टम की दिशा में बड़ा बदलाव है।

    रिपोर्ट के अनुसार, कई भारतीय खनन कंपनियां पहले ही अलग-अलग डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल कर रही हैं, लेकिन इन तकनीकों को एक साथ जोड़कर काम करने में अभी भी चुनौतियां हैं।

    रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर कंपनियां योजना, उत्पादन, लॉजिस्टिक्स, रख-रखाव, सुरक्षा और टिकाऊ संचालन को एकीकृत डिजिटल सिस्टम से नहीं जोड़ती हैं, तो डिजिटल निवेश का पूरा फायदा नहीं मिल पाएगा।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि नीतिगत सुधार, इस्पात की बढ़ती मांग, महत्वपूर्ण खनिजों की जरूरत और सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल खनन क्षेत्र में तेजी से बदलाव ला रही हैं।

    इसके अलावा, एआई-आधारित सुरक्षा सिस्टम, स्वचालित खनन संचालन, रियल टाइम मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म और हाइब्रिड क्लाउड-एज डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी तकनीकों को भारत के भविष्य के खनन क्षेत्र का प्रमुख आधार बताया गया है।