दिल्ली हाईकोर्ट ने व्यक्तित्व अधिकार संबंधी मुकदमे में अमन गुप्ता को अंतरिम राहत दी

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नई दिल्ली, 10 मई (आईएएनएस) दिल्ली हाई कोर्ट ने उद्यमी और ‘शार्क टैंक इंडिया’ के जज अमन गुप्ता को अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने कई संस्थाओं को उनके व्यक्तित्व अधिकार, ट्रेडमार्क, आवाज, छवि और अन्य विशिष्ट विशेषताओं का दुरुपयोग करने से रोक दिया है। ये संस्थाएं कथित तौर पर बिना अनुमति के मर्चेंडाइज, एआई से बना कंटेंट, फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट और भ्रामक कमर्शियल लिस्टिंग के जरिए उनका इस्तेमाल कर रही थीं।

न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की एकल-न्यायाधीश पीठ ने गुप्ता द्वारा कई प्रतिवादियों के खिलाफ दायर वाणिज्यिक मुकदमे में प्रथम दृष्टया उनके व्यक्तित्व और प्रचार अधिकारों के उल्लंघन को देखते हुए एकतरफा अंतरिम निषेधाज्ञा पारित की।

अपने आदेश में, दिल्ली हाईकोर्ट ने अनधिकृत वाणिज्यिक विज्ञापन, फर्जी इवेंट बुकिंग सूचियां, गुप्ता के नारों और तस्वीरों वाले उत्पादों की बिक्री, एआई-आधारित चैटबॉट प्रतिरूपण, आपत्तिजनक और अश्लील सामग्री का प्रसार और उनकी पहचान का उपयोग करके फर्जी इंस्टाग्राम प्रोफाइल से संबंधित आरोपों का उल्लेख किया।

बीओएटी के सह-संस्थापक और ऑफ/बीट के संस्थापक गुप्ता ने दावा किया कि उनके नाम, छवि, रूप, आवाज, हाव-भाव और पंजीकृत नारे जैसे ‘हम भी बना लेंगे’ और ‘हार नहीं मानेंगे’ ने उनके उद्यमों, मीडिया में उपस्थिति और सार्वजनिक पहचान के माध्यम से पर्याप्त सद्भावना और व्यावसायिक मूल्य अर्जित किया है।

न्यायमूर्ति गेडेला ने कहा कि गुप्ता ने पिछले पांच सीजन में ‘शार्क टैंक इंडिया’ से जुड़कर एक उद्यमी, निवेशक, सार्वजनिक वक्ता और टेलीविजन व्यक्तित्व के रूप में एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक छवि बनाई है। आदेश में कहा गया है कि रिकॉर्ड पर रखे गए साक्ष्य से पता चलता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गुप्ता के व्यक्तित्व और ट्रेडमार्क का व्यापक दुरुपयोग हुआ है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि जिस तरह से प्रतिवादी वादी के नाम, आवाज, व्यक्तित्व, नारों और पंजीकृत ट्रेडमार्क का शोषण कर रहे हैं, वह वादी के व्यक्तित्व के मूल तथ्य को स्पष्ट रूप से दर्शाता है, जो केवल उन्हीं के हैं और किसी और के नहीं।

अदालत ने कहा कि गुप्ता की पहचान का कथित तौर पर इस्तेमाल करके बनाई गई यौन रूप से आपत्तिजनक और एआई-जनरेटेड डीपफेक सामग्री के लिए तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता है। न्यायमूर्ति गेडेला ने टिप्पणी की कि यह स्पष्ट है कि प्रतिवादियों द्वारा वादी के व्यक्तित्व लक्षणों और विशेषताओं का उपयोग करके बनाई गई यौन रूप से आपत्तिजनक सामग्री/वीडियो निश्चित रूप से एक ऐसा पहलू है जिस पर न्यायालय द्वारा तत्काल और शीघ्र विचार करने की आवश्यकता है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रतिवादियों को गुप्ता के नाम, छवि, आवाज, वीडियो, जीआईएफ, संपर्क विवरण या उनके व्यक्तित्व के किसी भी पहलू का बिना अनुमति के दुरुपयोग या शोषण करने से रोक दिया, जिसमें एआई और डीपफेक तकनीकों का उपयोग भी शामिल है।

अदालत ने प्रतिवादियों को गुप्ता के पंजीकृत ट्रेडमार्क का उल्लंघन करने और वस्तुओं या सेवाओं को उनके द्वारा समर्थित या उनसे संबंधित बताकर बेचने से भी रोक दिया। इसके अलावा, गूगल एलएलसी और अन्य प्लेटफॉर्म से संबंधित प्रतिवादियों को उल्लंघनकारी सामग्री को हटाने या ब्लॉक करने और शिकायत में पहचाने गए कुछ कथित रूप से नकली खातों से संबंधित विवरण का खुलासा करने का निर्देश दिया गया।

मामले की सुनवाई संयुक्त रजिस्ट्रार के समक्ष 3 अगस्त को दलीलें पूरी करने के लिए और दिल्ली हाई कोर्ट के समक्ष 1 अक्टूबर को सूचीबद्ध की गई है।