फीफा वर्ल्ड कप 2026: नॉयर की वापसी पर हेड कोच नगेल्समैन ने चुप्पी साधी

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बर्लिन (जर्मनी), 17 मई (आईएएनएस)। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में जर्मन गोलकीपर मैनुअल नॉयर के खेलने को लेकर अटकलों का दौर जारी है। 40 वर्षीय नॉयर ने यूईएफए यूरो 2024 के बाद अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास लेने की घोषणा की थी।

बिल्ड और स्काई की रिपोर्ट्स में नॉयर की वापसी पक्की बताई जा रही है, लेकिन जर्मन नेशनल टीम के हेड कोच जूलियन नगेल्समैन ने इसकी साफ तौर पर पुष्टि नहीं की है। हालांकि, पहली बार उन्होंने बायर्न म्यूनिख के इस गोलकीपर की वापसी की संभावना से इनकार भी नहीं किया है। वर्ल्ड कप के लिए जर्मनी की अंतिम टीम की घोषणा 21 मई को होगी।

बिल्ड, स्पोर्ट1, किकर और स्काई की रिपोर्ट के अनुसार, नॉयर को मांसपेशियों में हल्की चोट लगने के कारण अंतिम घोषणा में देरी हुई है। इसी चोट के चलते बायर्न के इस गोलकीपर को कोलोन के खिलाफ अपने आखिरी लीग मैच के 60वें मिनट में एहतियातन मैदान से बाहर आना पड़ा था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, नगेल्समैन और नॉयर के बीच कई दौर की बातचीत हुई है और उन्होंने उन पुरानी गलतफहमियों को सुलझा लिया है, जो बायर्न के हेड कोच के तौर पर नगेल्समैन के कार्यकाल के दौरान पैदा हुई थीं।

बायर्न के कई अधिकारियों, जिनमें मैक्स एबरल भी शामिल हैं, उन्होंने नॉयर को जर्मनी का अब तक का सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर बताया है। वहीं, जर्मनी के पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी ओलिवर कान के अनुसार, होफ्फेनहेम के गोलकीपर ओलिवर बॉमन का प्रदर्शन तब से गिरा है, जब से कुछ महीने पहले उन्हें जर्मनी का नंबर एक गोलकीपर घोषित किया गया था।

जर्मनी के पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी स्टीफन एफेनबर्ग ने नगेल्समैन की जोखिम भरी रणनीति और स्पष्ट बयान न देने की उनकी नाकामी की आलोचना की है। बॉमन का दावा है कि उन्हें टीम में बदलाव के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी, जिसने इस मामले को और भी पेचीदा बना दिया है। 35 वर्षीय बॉमन ने कहा, “मेरा मानना ​​है कि मैं अभी भी नंबर-1 गोलकीपर हूं।”

कान ने नगेल्समैन के इस कदम को जोखिम भरा और मनमाना बताया। 56 वर्षीय कान ने कहा कि जर्मन कोच बॉमन के आत्मविश्वास को खतरे में डाल रहे हैं। बायर्न के पूर्व गोलकीपर ने कहा कि नॉयर की बढ़ती उम्र और चोट लगने की बढ़ती आशंका उनके लिए एक समस्या बन सकती है। नॉयर द्वारा बायर्न के साथ अपने अनुबंध को एक साल के लिए आगे बढ़ाने के बाद उन्होंने कहा, “हर दो-तीन दिन में मैच खेलना शरीर पर बहुत ज्यादा दबाव डालता है।”