नई दिल्ली, 19 मई (आईएएनएस)। ब्रिटेन ने अपनी वित्तीय स्थिति को ध्यान में रक विदेशी सहायता (फॉरेन एड) में कटौती किए जाने का ऐलान किया। इसका सबसे ज्यादा असर झेलने वाले देशों में पाकिस्तान भी शामिल है। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
द बोरगन प्रोजेक्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन सरकार ने 2027 तक अपनी विकास सहायता को सकल राष्ट्रीय आय (जीएनआई) के 0.5 प्रतिशत से घटाकर 0.3 प्रतिशत करने का फैसला लिया है। इसके तहत 6 अरब डॉलर से अधिक की विदेशी सहायता में कटौती की जाएगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान और मोजाम्बिक को सबसे ज्यादा झटका लगेगा, जबकि यमन, सोमालिया और अफगानिस्तान जैसे देशों को भी सीधे अनुदान में कमी का सामना करना पड़ेगा।
ब्रिटेन की विदेश मंत्री अवैत कूपर ने संसद में कहा कि वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों, खासकर यूक्रेन युद्ध के चलते सरकार को रक्षा खर्च बढ़ाना पड़ रहा है, इसलिए “कठिन फैसले और समझौते” करने पड़ रहे हैं।
कोविड-19 महामारी से पहले ब्रिटेन अपनी जीएनआई का 0.7 प्रतिशत विदेशी सहायता पर खर्च करता था, लेकिन हाल के वर्षों में इसमें लगातार कमी आई है।
ब्रिटेन सरकार ने कहा है कि अब वह विकासशील देशों में निजी निवेश और विशेषज्ञता को बढ़ावा देने के लिए “निवेश आधारित साझेदारी” मॉडल पर ज्यादा ध्यान देगी।
रिपोर्ट के अनुसार, इन कटौतियों से कई देशों के विकास कार्यक्रम प्रभावित होंगे और उन्हें वैकल्पिक वित्तीय स्रोतों, खासकर प्रवासी नागरिकों द्वारा भेजी जाने वाली रकम , पर अधिक निर्भर होना पड़ेगा।
पाकिस्तान में विदेशों में रहने वाले 80 लाख से अधिक नागरिकों से आने वाली रकम बढ़कर लगभग 30 अरब डॉलर तक पहुंच गई है, जिससे विदेशी सहायता में आई कमी की आंशिक भरपाई हो रही है।
वहीं मोजाम्बिक जैसे देशों, जहां प्रवासी आय कम है, को संयुक्त राष्ट्र जैसी बहुपक्षीय एजेंसियों पर अधिक निर्भर रहना पड़ सकता है, खासकर हाल की बाढ़ के बाद जब लाखों लोग विस्थापित हुए हैं।

