नई दिल्ली/भोपाल, 22 मई (आईएएनएस)। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने शुक्रवार को अधिवक्ता समर्थ सिंह का वकालत करने का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई मध्य प्रदेश में चर्चा में आए ट्विशा शर्मा मौत मामले से जुड़ी है।
बीसीआई के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा द्वारा यह आदेश जारी किया गया। उन्होंने कहा कि समर्थ सिंह की कथित भूमिका और जांच के दौरान उनके व्यवहार के कारण यह कार्रवाई की गई है।
आईएएनएस से बात करते हुए मिश्रा ने कहा, ”हमने उनका लाइसेंस निलंबित कर दिया है। उनकी पत्नी ट्विशा शर्मा की हत्या में उनकी भूमिका है। जांच में यह प्रथम दृष्टया साबित हुआ है। इसके अलावा वे जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे और फरार थे।”
उन्होंने कहा कि जब तक ट्रायल में स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक ऐसे व्यक्ति को वकालत करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
मिश्रा ने मामले को गंभीर और संवेदनशील बताते हुए कहा कि इसमें प्रभावशाली लोग शामिल हैं, जिससे गवाहों और सबूतों पर असर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा, ”उनकी मां जिला न्यायाधीश हैं। ये काफी प्रभावशाली लोग हैं, इसलिए गवाह आसानी से सामने नहीं आएंगे। सबूतों से छेड़छाड़ की संभावना है।
मिश्रा ने मध्य प्रदेश सरकार के उस फैसले का भी समर्थन किया, जिसमें मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई है। उन्होंने कहा कि इससे निष्पक्ष और व्यापक जांच में मदद मिलेगी।
समर्थ सिंह, जो अपनी पत्नी ट्विशा शर्मा की 12 मई को हुई कथित आत्महत्या के बाद फरार थे, को शुक्रवार को भोपाल पुलिस ने जबलपुर कोर्ट परिसर से गिरफ्तार किया।
गिरफ्तारी से पहले उन्होंने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की मुख्य पीठ में अपनी अंतरिम जमानत याचिका वापस ले ली थी।
हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि आरोपी यदि पुलिस से डर के कारण आत्मसमर्पण करना चाहता है, तो वह ट्रायल कोर्ट या जांच अधिकारी के समक्ष समर्पण कर सकता है और उसके बाद कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
एक अन्य बड़े घटनाक्रम में, हाईकोर्ट ने ट्विशा शर्मा के शव का दूसरा पोस्टमार्टम एम्स दिल्ली की टीम से कराने का आदेश भी दिया है, क्योंकि परिवार ने पहले पोस्टमार्टम में गड़बड़ी का आरोप लगाया था।

