Tuesday, July 21, 2026
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शराब नीति घोटाला : दिल्ली हाईकोर्ट ने हैदराबाद के कारोबारी अरुण पिल्लई की अंतरिम जमानत को बढ़ाने से किया इनकार

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नई दिल्ली, 22 जनवरी (आईएएनएस)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने कथित शराब नीति घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हैदराबाद स्थित व्यवसायी अरुण रामचंद्र पिल्लई को दी गई अंतरिम जमानत बढ़ाने से इनकार कर दिया है।

पिल्लई को सर्जरी के बाद अपनी पत्नी की चिकित्सीय स्थिति का हवाला देते हुए 28 दिसंबर को अंतरिम जमानत मिल गई थी।

पिल्लई को पिछले साल 28 दिसंबर को उनकी पत्नी की मेडिकल स्थिति के आधार पर अंतरिम जमानत दी गई थी। उनकी पत्नी की सर्जरी हुई थी।

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने पिल्लई की पत्नी की चिकित्सा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, राष्ट्रीय राजधानी में उनकी वापसी की सुविधा के लिए और जरूरत पड़ने पर एक नर्स की व्यवस्था करने के लिए तीन दिन की मोहलत दी।

अदालत ने पिल्लई को 24 जनवरी को जेल प्राधिकरण के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया और यह स्पष्ट किया कि भविष्य में इसी आधार पर अंतरिम जमानत के विस्तार के किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा।

अदालत ने स्पष्ट किया, “अंतरिम जमानत किसी आपात स्थिति के उद्देश्य से छोटी अवधि के लिए है और इसे लंबी अवधि के लिए नहीं बढ़ाया जा सकता है।”

पिल्लई ने यह कहते हुए विस्तार की मांग की थी कि उनकी पत्नी को पीआरपी स्टेरॉयड प्रक्रिया के चलते छह सप्ताह के लिए एक स्थायी नर्स की आवश्यकता है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने विस्तार का विरोध करते हुए कहा कि स्थायी नर्स की कोई आवश्यकता नहीं है। पत्नी को केवल पीआरपी इंजेक्शन की जरूरत है।

अदालत ने पिल्लई की पत्नी को पीआरपी इंजेक्शन दिए जाने का संकेत देने वाले मेडिकल रिकॉर्ड की समीक्षा करने के बाद अंतरिम जमानत को आगे बढ़ाने का कोई आधार नहीं पाया।

चिकित्सा स्थिति पर ध्यान देते हुए, अदालत ने कहा कि पिल्लई 18 दिसंबर, 2023 से अंतरिम जमानत पर थे, जिसके चलते उन्हें पिछले आदेश के अनुसार 24 जनवरी को आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया गया था।”

हालांकि, अदालत ने पिल्लई को दिल्ली वापस आने और यदि आवश्यक हो तो एक परिचारक की व्यवस्था करने के लिए समान नियम और शर्तों को बनाए रखते हुए तीन दिन की मोहलत दी।

पिल्लई ने हैदराबाद में अपनी बीमार पत्नी की देखभाल के लिए जमानत मांगी थी। पहले यह प्रस्तुत किया गया था कि उनकी पत्नी को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद जटिलताएं विकसित हुईं।

पिछले साल नवंबर में, अदालत ने पिल्लई को दो सप्ताह की अंतरिम जमानत दी थी, जिन्हें 6 मार्च को गिरफ्तार किया गया था।

राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश एमके नागपाल के समक्ष पिल्लई की ओर से पेश हुए वकील नितेश राणा ने दावा किया था कि उनके मुवक्किल की पत्नी को सर्जिकल प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है, वह बेहद बीमार है। चूंकि, वह अकेली रहती हैं, इसलिए, उसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है।

इससे पहले ईडी ने पिल्लई की जमानत याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में जवाब दाखिल किया था। उन्होंने एक अन्य याचिका पर भी प्रतिक्रिया दायर की, जिसमें उनकी गिरफ्तारी को अवैध और धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 19(1) का उल्लंघन बताया गया।

याचिका में गिरफ्तारी के लिए आधार प्रदान करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को अनिवार्य और अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए, पिल्लई ने कहा था कि गिरफ्तारी का कोई आधार, मौखिक या लिखित, उन्हें कभी भी प्रदान नहीं किया गया था, जैसा कि पीएमएलए की धारा 19(1) के तहत आवश्यक है।

–आईएएनएस

पीके/एबीएम