Friday, June 5, 2026
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‘ट्रायल के जल्द खत्म होने की उम्मीद नहीं’, सुप्रीम कोर्ट ने एनडीपीएस मामले के आरोपी को जमानत दी

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नई दिल्ली, 5 जून (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एनडीपीएस (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस) एक्ट के कड़े प्रावधानों के तहत एक शख्स को जमानत दी। कोर्ट ने देखा कि वह लगभग दो साल से हिरासत में है और निकट भविष्य में ट्रायल खत्म होने की कोई संभावना नहीं है।

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस अरविंद कुमार की बेंच ने बापन हलदर की अपील मंजूर कर ली और कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उसकी रेगुलर जमानत की अर्जी खारिज कर दी गई थी।

पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर जिले में स्थित भीमपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर में आरोपी बनाए गए हलदर पर एनडीपीएस एक्ट की धारा 21(सी) और 29 के तहत अपराधों के लिए मुकदमा चल रहा है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, पुलिस अधिकारियों को एक कंटेनर के बारे में जानकारी मिली थी, जिसमें कथित तौर पर प्रतिबंधित सामान था।

14 जुलाई 2024 को कंटेनर की तलाशी के दौरान, अपीलकर्ता सहित दो लोगों को पकड़ा गया और कथित तौर पर फेंसेडिल कफ सिरप की 20,000 बोतलें बरामद की गईं, जिसके बाद एफआईआर दर्ज की गई।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में अपीलकर्ता की ओर से दी गई दलील को दर्ज किया कि तीन सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है और हलदर से हिरासत में पूछताछ की जरूरत नहीं है, क्योंकि मामले में आरोप तय किए जा चुके हैं।

कोर्ट ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि अभियोजन पक्ष द्वारा बताए गए कुल 39 गवाहों में से केवल एक सरकारी गवाह से पूछताछ की गई है।

जस्टिस नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा, “मामले पर विस्तार से विचार करने और इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि अपीलकर्ता पहले ही एक साल और दस महीने से अधिक समय तक जेल में रह चुका है और निकट भविष्य में ट्रायल खत्म होने की कोई संभावना नहीं है। हम मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए अपीलकर्ता को जमानत पर रिहा करना उचित समझते हैं।”

अपील को मंजूरी देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि अपीलकर्ता को ट्रायल कोर्ट द्वारा तय की गई शर्तों के अधीन जमानत पर रिहा किया जाए। कलकत्ता हाई कोर्ट ने पहले हलदर को जमानत देने से इनकार कर दिया था, जबकि कोर्ट ने यह भी माना था कि वह एक साल और नौ महीने से ज्‍यादा समय से हिरासत में हैं और चार्जशीट में बताए गए 39 गवाहों में से सिर्फ एक से ही पूछताछ हुई है।

याचिका को खारिज करते हुए जस्टिस तीर्थंकर घोष की सिंगल-जज बेंच ने कहा था, “अगर मामला साबित हो जाता है और अब तक की गई जब्ती को चुनौती नहीं दी गई है तो इसके नतीजों को देखते हुए मैं याचिकाकर्ता को जमानत पर रिहा करने के पक्ष में नहीं हूं।”