चेन्नई, 6 जून (आईएएनएस)। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने तमिलनाडु के चर्चित रामलिंगम हत्याकांड में फरार आरोपियों को शरण देने के आरोप में प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के चार पूर्व सदस्यों के खिलाफ शनिवार को चेन्नई के पूनमल्ली स्थित विशेष एनआईए अदालत में चार्जशीट दाखिल की।
एनआईए की ओर से जारी बयान के अनुसार, चार्जशीट में के. मोहिदीन, मोहम्मद इमरान, थमीम अंसारी और असमत को आरोपी बनाया गया है। एजेंसी का आरोप है कि इन चारों ने रामलिंगम हत्याकांड में शामिल हमलावरों और साजिशकर्ताओं को जानबूझकर शरण दी, जो सांप्रदायिक तनाव फैलाने और आतंक का माहौल बनाने की बड़ी साजिश का हिस्सा था।
एनआईए ने इन आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 61(2) तथा धारा 249 बीएनएस को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 19 के साथ लागू करते हुए आरोप तय किए हैं।
एनआईए के मुताबिक, 5 फरवरी 2019 को रामलिंगम की निर्मम हत्या कर दी गई थी। एजेंसी का दावा है कि घटना उस समय हुई जब रामलिंगम ने तिरुभुवनम के पक्कू विनायकम थोप्पु इलाके में कथित जबरन धर्मांतरण की कोशिश कर रहे पीएफआई सदस्यों का विरोध किया था। इसी दौरान विवाद बढ़ने पर उनकी हत्या कर दी गई।
जांच एजेंसी ने बताया कि इस मामले में की गई जांच से पता चला कि चारों आरोपियों ने हत्या में शामिल दो फरार आरोपियों मोहम्मद बुरहानुद्दीन और मोहम्मद नबील हसन को लगभग छह वर्षों तक शरण दी, जबकि उन्हें उनके अपराध की पूरी जानकारी थी।
इससे पहले एनआईए इस मामले में 18 आरोपियों, जिनमें छह फरार घोषित अपराधी भी शामिल थे, के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। बाद में एजेंसी ने इनमें से चार फरार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था।
एनआईए ने फरार आरोपियों को शरण देने के आरोप में मोहम्मद अली जिन्ना और इम्ताथुल्ला को भी गिरफ्तार किया था, जिनके खिलाफ क्रमशः मई 2025 और फरवरी 2026 में चार्जशीट दाखिल की गई थी।

