काठमांडू, 3 जुलाई (आईएएनएस)। नेपाल से बाहर जाने वाले टूरिज्म की मुख्य वजह सीमा-पार शॉपिंग है, खासकर नेपाल-भारत सीमा के पास। यह बात नेपाल के नेशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (एनएसओ) के एक सर्वे में सामने आई है।
सरकार की स्टैटिस्टिक्स एजेंसी ने घरेलू पर्यटन सर्वे के तहत नेपाल के लोगों की विदेश यात्राओं का भी अध्ययन किया। यह सर्वे 16 अक्टूबर 2024 से 15 अक्टूबर 2025 के बीच किया गया, ताकि पूरे साल के अलग-अलग मौसमों में यात्रा के रुझानों को समझा जा सके।
सर्वे के मुताबिक, इस अवधि में नेपाली लोगों ने विदेशों की 41 लाख से ज्यादा यात्राएं कीं। इनमें 35 लाख एक ही दिन में जाकर लौट आने वाली यात्राएं थीं, जबकि 6.22 लाख यात्राएं ऐसी थीं, जिनमें कम से कम एक रात बाहर रुका गया।
गुरुवार को जारी ‘डोमेस्टिक टूरिज्म सर्वे 2025’ रिपोर्ट में कहा गया है कि एक ही दिन में होने वाली विदेश यात्राओं में सबसे बड़ी वजह खरीदारी थी। ऐसी कुल यात्राओं में लगभग 63.9 प्रतिशत लोग सिर्फ खरीदारी के लिए गए।
रिपोर्ट के अनुसार, इससे साफ पता चलता है कि खासकर नेपाल-भारत सीमा पर होने वाली खरीदारी लोगों के विदेश जाने की सबसे बड़ी वजह बन गई है।
नेपाल-भारत के बीच खुली सीमा है और दोनों देशों के रिश्तों को अक्सर ‘रोटी-बेटी’ का रिश्ता कहा जाता है, जो दोनों देशों के गहरे सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों को दिखाता है। रोजगार, शादी-ब्याह और पारिवारिक रिश्तों के अलावा, दोनों देशों के बीच व्यापार भी लंबे समय से बहुत अहम रहा है।
सीमा के पास रहने वाले नेपाली लोग अक्सर भारत के नजदीकी शहरों में रोजमर्रा की जरूरत का सामान खरीदने जाते हैं, क्योंकि वहां उन्हें वही सामान कम कीमत पर मिल जाता है।
जब प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की सरकार ने यह नियम लागू करने की कोशिश की कि भारत से 100 एनपीआर (नेपाली रुपये) से ज्यादा कीमत का सामान लाने पर कस्टम ड्यूटी देनी होगी, तो सीमा क्षेत्रों के लोगों और भारतीय व्यापारियों ने इसका जोरदार विरोध किया। बाद में नेपाल के सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद सरकार का यह फैसला फिलहाल रोक दिया गया।
सर्वे के मुताबिक, नेपाली लोगों की एक ही दिन में होने वाली विदेश यात्राओं में सबसे ज्यादा यात्राएं भारत की थी। इससे दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक और सामाजिक रिश्तों के साथ-साथ सीमा पार आने-जाने की आसान व्यवस्था भी साफ दिखाई देती है।
नेपाल के सातों प्रांतों में मधेश प्रांत से सबसे ज्यादा एक-दिवसीय विदेश यात्राएं हुईं, जबकि लुंबिनी प्रांत से सबसे ज्यादा रात रुककर की जाने वाली विदेश यात्राएं दर्ज की गईं। ये दोनों ही प्रांत भारत की सीमा से जुड़े हुए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, इन दोनों प्रांतों से भारत आने-जाने की सुविधा आसान होने की वजह से लोग खरीदारी, व्यापार, धार्मिक कामों और रिश्तेदारों से मिलने के लिए बड़ी संख्या में यात्रा करते हैं।
सर्वे में बताया गया कि नेपाल के सातों प्रांतों में एक ही दिन की विदेश यात्राओं पर होने वाले कुल खर्च का 70.7 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ खरीदारी पर खर्च हुआ।
खास तौर पर मधेश और लुंबिनी प्रांतों में खरीदारी पर खर्च का हिस्सा सबसे ज्यादा रहा, जो भारत के साथ होने वाली सीमा पार खरीदारी को दिखाता है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि विदेश जाने वाली यात्राओं में भारत के लिए होने वाली एक-दिवसीय यात्राओं की संख्या सबसे अधिक है।
वहीं, रात रुककर की जाने वाली विदेश यात्राओं की सबसे बड़ी वजह दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलना (40.3 प्रतिशत) रही। इसके बाद इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए यात्रा (19.6 प्रतिशत) और धार्मिक कारणों से यात्रा (19.6 प्रतिशत) का स्थान रहा।
सर्वे के अनुसार, नेपाली लोगों की विदेश यात्राएं नवंबर से जनवरी के बीच सबसे ज्यादा होती हैं। इस दौरान 50.2 प्रतिशत एक-दिवसीय यात्राएं और 32.7 प्रतिशत रात रुककर की जाने वाली यात्राएं हुईं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे पता चलता है कि विदेश यात्राएं साल के इसी समय सबसे ज्यादा होती हैं। इसकी मुख्य वजह त्योहारों का मौसम और यात्रा के लिए अनुकूल समय माना जा सकता है।

