Saturday, July 4, 2026
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बाबा सिद्दीकी हत्याकांड: बेटी शहजीन ने कोर्ट में दाखिल की विस्तृत अर्जी, मुंबई क्राइम ब्रांच पर लगाए गंभीर आरोप

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मुंबई, 4 जुलाई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) नेता और पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी हत्याकांड में एक बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। सिद्दीकी की बेटी शहजीन जियाउद्दीन सिद्दीकी ने विशेष अदालत में एक विस्तृत आवेदन दाखिल कर मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया है कि जांच एजेंसी को निर्देश दिया जाए कि वह इस मामले के वांटेड मुख्य आरोपी अनमोल बिश्नोई की तत्काल कस्टडी लेकर उससे पूछताछ करे और उसे अन्य आरोपियों के साथ ट्रायल का सामना कराने के लिए अदालत में पेश करे।

बाबा सिद्दीकी की बेटी द्वारा दाखिल अर्जी में कहा गया है कि मुंबई क्राइम ब्रांच द्वारा दायर चार्जशीट के अनुसार अनमोल बिश्नोई इस हत्याकांड का वांटेड मुख्य आरोपी है और बिश्नोई गैंग के प्रमुख सदस्यों में शामिल है। इसके बावजूद जांच एजेंसी ने उसकी कस्टडी हासिल करने के लिए अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया है।

शहजीन सिद्दीकी ने दावा किया है कि उनके परिवार ने स्वयं प्रयास कर यह जानकारी जुटाई थी कि अनमोल बिश्नोई अमेरिका के आयोवा राज्य में डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (डीएचएस) की हिरासत में है। यह जानकारी जांच अधिकारियों को भी उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन इसके बावजूद एजेंसी ने उसे भारत लाने या उसकी कस्टडी लेने के लिए अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई।

अर्जी में यह भी कहा गया है कि घटना के बाद तीनों शूटरों को जल्द गिरफ्तार कर लिया गया था और जांच के दौरान कुल 27 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। हालांकि, परिवार का मानना है कि जांच हत्या के वास्तविक मकसद और साजिश के मूल स्रोत तक नहीं पहुंची। शहज़ीन का आरोप है कि पुलिस ने केवल एक सीमित दायरे में जांच की और कई महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज कर दिया।

याचिका में शाहजीन ने कहा है कि उनके भाई जीशान सिद्दीकी ने अपने बयान में कुछ ऐसे लोगों के नाम बताए थे, जिनसे पूछताछ की जानी चाहिए थी। लेकिन मुंबई क्राइम ब्रांच ने न तो उन लोगों से पूछताछ की और न ही उनके बयानों के आधार पर आगे जांच की। इसी वजह से परिवार को जांच की निष्पक्षता और गंभीरता पर संदेह हुआ।

अर्जी के अनुसार, परिवार ने सूचना के अधिकार (आईटीआई) कानून के तहत अनमोल बिश्नोई के संबंध में जानकारी मांगी थी। जांच अधिकारी ने यह कहते हुए जानकारी देने से इनकार कर दिया कि यह गोपनीय है। इसके बाद परिवार ने डीसीपी (क्राइम) के समक्ष अपील भी दायर की, लेकिन वहां भी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। शहजीन का कहना है कि मुंबई क्राइम ब्रांच ने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि अनमोल बिश्नोई को भारत लाने या उसकी कस्टडी लेने के लिए क्या कदम उठाए गए।

याचिका में कहा गया है कि बाद में अमेरिका सरकार ने अनमोल बिश्नोई को भारत भेज दिया। इसके बाद वह राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की हिरासत में रहा और एनआईए की जांच पूरी होने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। शहज़ीन का कहना है कि यही वह उचित समय था जब मुंबई क्राइम ब्रांच को उसकी कस्टडी लेकर इस हत्याकांड में पूछताछ करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

अर्जी में अदालत को बताया गया है कि इस मामले में 27 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय हो चुके हैं और ट्रायल शुरू होने की प्रक्रिया चल रही है। सुनवाई के दौरान अदालत ने विशेष लोक अभियोजक से यह भी पूछा था कि वांटेड आरोपी अनमोल बिश्नोई को इस मामले में पेश करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। याचिका के अनुसार, अभियोजन पक्ष इस संबंध में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका।

शहजीन सिद्दीकी ने अपनी अर्जी में यह भी आरोप लगाया है कि यदि अनमोल बिश्नोई से इस मामले में पूछताछ की जाती है तो हत्या के वास्तविक मकसद, कथित साजिश और उन लोगों की भूमिका सामने आ सकती है जिनके कहने पर यह अपराध किया गया। आरोप है कि इसी कारण मुंबई क्राइम ब्रांच उसकी कस्टडी लेने से बच रही है। हालांकि, यह सभी आरोप याचिकाकर्ता द्वारा अदालत में लगाए गए हैं और इन पर अदालत का कोई निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि यदि अनमोल बिश्नोई को बाद में इस मामले में गिरफ्तार किया जाता है तो ट्रायल की प्रक्रिया दोबारा करनी पड़ सकती है, जिससे न्यायिक समय और सरकारी संसाधनों की अनावश्यक बर्बादी होगी। इसलिए मुंबई क्राइम ब्रांच को अभी उसकी कस्टडी लेकर उसे मौजूदा ट्रायल का हिस्सा बनाना चाहिए।

शहजीन सिद्दीकी ने अदालत से मांग की है कि मुंबई क्राइम ब्रांच से यह पूछा जाए कि अनमोल बिश्नोई की कस्टडी लेने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और यदि कोई कदम नहीं उठाया गया तो उसका कारण बताया जाए। साथ ही अदालत जांच एजेंसी को निर्देश दे कि बिना किसी और देरी के अनमोल बिश्नोई की कस्टडी लेकर उसे इस मामले में अदालत के समक्ष पेश किया जाए, ताकि मुकदमे की सुनवाई निष्पक्ष, प्रभावी और बिना किसी अनावश्यक देरी के पूरी हो सके।