Tuesday, August 11, 2026
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एयर इंडिया के सीईओ से फुकेत-दिल्ली फ्लाइट की घटना के बारे में हुई पूछताछ

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नई दिल्ली, 11 अगस्त (आईएएनएस)। नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा और वरिष्ठ अधिकारियों ने मंगलवार को एयर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन के साथ बैठक की। यह बैठक टाटा ग्रुप की एयरलाइन की फुकेत-दिल्ली उड़ान के दौरान हवा में आए झटकों (टर्बुलेंस) की घटना के संबंध में थी।

पिछले सप्ताह हुई इस घटना में 36,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा विमान अचानक 300 फीट नीचे आ गया था जिससे विमान में सवार 17 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

बैठक में सिविल एविएशन सेक्रेटरी के अलावा सिविल एविएशन के डायरेक्टर जनरल वीर विक्रम यादव और एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी) के डायरेक्टर जनरल जी.वी.जी. युगांधर भी मौजूद थे।

टाटा संस के चेयरमैन के एग्जीक्यूटिव एडवाइजर और पूर्व सिविल एविएशन सेक्रेटरी प्रदीप सिंह खरोला के साथ-साथ एयर इंडिया के फ्लाइट सेफ्टी हेड दीपक जोशी भी कैंपबेल के साथ बैठक में शामिल हुए।

सूत्रों ने बताया कि सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने एयरलाइन के तीन सीनियर अधिकारियों को 4 अगस्त की उस घटना के बारे में विस्तार से जानकारी देने के लिए बुलाया था, जिसमें एयर इंडिया का ए320नीयो विमान शामिल था। यह विमान थाईलैंड के फुकेत से दिल्ली आ रहा था।

पूर्व नौकरशाह खरोला अभी टाटा संस और एयर इंडिया के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के एग्जीक्यूटिव एडवाइजर हैं। सूत्रों के मुताबिक, एयरबस ए320 विमान वीटी-ईएक्सओ से ऑपरेट होने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट एआई2379 में भी तकनीकी खराबी आई थी, जिसमें हाइड्रोलिक फेलियर और उड़ान के दौरान ऑटोपायलट का डिस्कनेक्ट होना शामिल था।

विमान बनाने वाली कंपनी एयरबस और फ्रांस की एविएशन एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी बीईए इस घटना की जांच में शामिल होंगी।

घटना में शामिल ए320 विमान की निर्माता कंपनी होने के नाते, एयरबस जांचकर्ताओं को तकनीकी मदद भी दे सकती है। इस बड़ी एयरोस्पेस कंपनी की भागीदारी, इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन (आईसीएओ) के एनेक्स 13 के तहत विमान निर्माताओं द्वारा दी जाने वाली तकनीकी सहायता का हिस्सा है। ऐसी सहायता में जांचकर्ताओं को विमान के सिस्टम को समझने और तकनीकी व उड़ान डेटा का विश्लेषण करने में मदद करना शामिल हो सकता है।

एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी) ने इस घटना को ‘गंभीर घटना’ (सीरियस इंसिडेंट) की श्रेणी में रखा है। जांच में विमान की ऊंचाई में अचानक बदलाव और फ्लाइट क्रू की कार्रवाई से जुड़ी परिस्थितियों की भी पड़ताल की जा रही है। जांच के हिस्से के तौर पर विमान के फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर को जांच के लिए सुरक्षित कर लिया गया है।

उम्मीद है कि ये रिकॉर्ड जांचकर्ताओं को टर्बुलेंस (हवा के झटकों) का सामना करते समय विमान की प्रतिक्रिया को समझने और यह पता लगाने में मदद करेंगे कि क्या कोई विमान सिस्टम या चेतावनी इसमें शामिल थी।

इस बीच, डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) ने जांच पूरी होने तक दोनों पायलटों को रोस्टर से हटा दिया है।

दिल्ली पहुंचने के बाद पायलटों की साइकोएक्टिव पदार्थों के लिए पोस्ट-फ्लाइट स्क्रीनिंग की गई। सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने रविवार को बताया कि पायलट-इन-कमांड की शुरुआती स्क्रीनिंग टेस्ट ‘नेगेटिव नहीं’ था और सैंपल को कन्फर्मेटरी टेस्ट के लिए भेजा गया है। सरकार ने कहा कि जांच और पुष्टि करने वाले टेस्ट के नतीजों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।