Thursday, August 13, 2026
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केंद्र सरकार एसिड अटैक पीड़ितों की रेल यात्रा के लिए पॉलिसी बनाने पर तैयार, सुप्रीम कोर्ट ने छह सप्ताह का दिया समय

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नई दिल्ली, 13 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने एसिड अटैक पीड़ितों को रियायती यात्रा सुविधा देने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को इस मुद्दे पर ड्राफ्ट पॉलिसी जमा करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है।

एक वकील ने कहा कि यह पॉलिसी एसिड अटैक से बचे उन लोगों को रेल यात्रा में छूट दिलाने में मदद करेगी, जिन्हें शहरों के अच्छे अस्पतालों में समय-समय पर जाना पड़ता है।

केंद्र की ओर से पेश हुईं एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि रेलवे बोर्ड ‘मरीज कैटेगरी’ के तहत एसिड अटैक पीड़ितों को यात्रा में छूट देने के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गया है।

हालांकि, दवे ने कहा कि पॉलिसी अभी तैयार की जा रही है, जिसमें यह भी शामिल है कि छूट कैसे दी जाएगी और इसकी अवधि क्या होगी।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह छह सप्ताह के भीतर प्रस्तावित पॉलिसी का ड्राफ्ट रिकॉर्ड पर रखे।

याचिकाकर्ता ने बेंच (जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे) को बताया कि ‘मरीज कैटेगरी’ के तहत मिलने वाली मौजूदा छूट की कुछ सीमाएं हैं। यह सुविधा आमतौर पर किसी खास स्टेशन से किसी खास डेस्टिनेशन तक की यात्रा से जुड़ी होती है। वहीं, एसिड अटैक से बचे लोगों को इलाज के लिए अलग-अलग शहरों में जाना पड़ सकता है।

उन्होंने अलग-अलग अस्पतालों से बार-बार छूट के सर्टिफिकेट लेने की जरूरत को भी अतिरिक्त समस्या बताया, खासकर हमले के शुरुआती महीनों में जब इलाज बहुत जरूरी हो सकता है।

याचिकाकर्ता ‘अतिजीवन सोसायटी’ ने ऐसे यात्रियों के लिए इमरजेंसी टिकट कोटा पर विचार करने की भी मांग की। याचिकाकर्ता ने कहा, “इमरजेंसी कोटे की जरूरत इसलिए है क्योंकि पीड़ितों को कम समय की सूचना पर यात्रा करनी पड़ सकती है। अगर उन्हें समय पर इलाज नहीं मिलता है, तो यह एक विफलता बन जाती है।”

केंद्र ने कहा कि पॉलिसी बनाते समय इन पहलुओं पर विचार किया जा सकता है, लेकिन उसे दिव्यांग कैटेगरी के तहत छूट देने पर आपत्ति है, क्योंकि इससे दिव्यांगता की अलग-अलग कैटेगरी के बीच अंतर करना पड़ेगा।

सरकार कोर्ट में प्रस्तावित पॉलिसी पेश करने से पहले ‘अतिजीवन सोसायटी’ के साथ इसे साझा करने पर सहमत हो गई, ताकि संगठन अपने सुझाव दे सके।