Monday, August 24, 2026
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एक्शन मोड में ईडी, एसएससी ग्रुप-सी और डी स्टाफ भर्ती घोटाला सिलसिले में कई लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज

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कोलकाता, 24 अगस्त (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कोलकाता जोनल ऑफिस ने पश्चिम बंगाल में एसएससी ग्रुप-सी और ग्रुप-डी स्टाफ भर्ती घोटाले के सिलसिले में पार्थ चटर्जी, अर्पिता मुखर्जी, कुंतल घोष और अन्य लोगों के खिलाफ स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए), कोलकाता में पहली सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट 20 अगस्त को दायर की है। यह शिकायत 22 जनवरी 2025 की प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट के क्रम में ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002’ के प्रावधानों के तहत दायर की गई है।

इसी को लेकर ईडी ने सोमवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जानकारी दी कि ईडी ने पश्चिम बंगाल सेंट्रल स्कूल सर्विस कमीशन (डब्ल्यूबीसीएसएससी) के जरिए ग्रुप-सी और ग्रुप-डी स्टाफ की भर्ती में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ियों के संबंध में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), एसीबी, कोलकाता द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। इसमें शामिल अपराध भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के प्रावधानों के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार से संबंधित हैं।

पीएमएलए के तहत जांच से पता चला है कि भर्ती घोटाला ओएमआर स्कोर में हेरफेर, रैंक जंपिंग (रैंक में हेरफेर), जाली और पिछली तारीख के सिफारिश पत्र जारी करने, पैनल की समय-सीमा खत्म होने के बाद अवैध नियुक्तियां करने और तय भर्ती प्रक्रियाओं को दरकिनार करके अयोग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति करने के जरिए किया गया था।

जांच में यह भी पता चला है कि शिक्षा विभाग के तत्कालीन प्रभारी मंत्री पार्थ चटर्जी का डब्ल्यूबीसीएसएससी और उससे जुड़ी संस्थाओं पर पूरा नियंत्रण था और उन्होंने अवैध भर्तियों को प्रभावित करने और उनमें मदद करने के लिए अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया। जांच से पता चला है कि उनके निर्देशों पर अयोग्य उम्मीदवारों की सूची तैयार की गई थी और सिफारिश व नियुक्ति पत्र जारी करने के लिए उन्हें बिचौलियों (जिनमें प्रसन्न कुमार रॉय और उनके सहयोगी शामिल थे) के जरिए भेजा गया था। जांच में अवैध नियुक्तियों को आसान बनाने के लिए ओएमआर-आधारित परीक्षा परिणामों में हेरफेर और रैंक जंपिंग का भी पता चला है।

जांच में यह भी पता चला है कि बिचौलियों और एजेंटों के एक नेटवर्क ने पक्की नौकरी का वादा करके इच्छुक उम्मीदवारों से अवैध पैसे वसूले थे। इसमें लगभग 10 लाख रुपए से लेकर अलग-अलग पदों के लिए उम्मीदवारों से 20 लाख रुपए की मांग की गई थी, जबकि ग्रुप-सी पदों के लिए 15-16 लाख रुपए और ग्रुप-डी पदों के लिए 10-12 लाख रुपए की रकम अयोग्य उम्मीदवारों से वसूली गई थी। इसमें प्रसन्ना कुमार रॉय मुख्य बिचौलिए के तौर पर काम करते थे और अपने साथियों के साथ मिलकर अपराध से हुई कमाई को इकट्ठा करने और उसे आगे भेजने का काम करते थे।

जांच में ग्रुप-सी और ग्रुप-डी भर्ती घोटाले में अपराध से हुई कमाई का आंकड़ा कम से कम 630.40 करोड़ रुपए बताया गया है। यह आंकड़ा गैर-कानूनी नियुक्तियों की संख्या और उम्मीदवारों से वसूली गई रकम के आधार पर तय किया गया है। जांच में यह भी पता चला है कि अपराध से हुई असल कमाई इससे ज्यादा हो सकती है, क्योंकि इस घोटाले में गैर-कानूनी भर्ती के दूसरे तरीके भी शामिल थे, जैसे रैंक जंपिंग, पैनल से बाहर की नियुक्तियां, पैनल की समय-सीमा खत्म होने के बाद नियुक्तियां और आरटीआई/री-इवैल्यूएशन सिस्टम में हेर-फेर।

जांच में यह भी पता चला है कि गैर-कानूनी भर्ती से हुई अवैध कमाई को सहयोगियों, प्रॉक्सी और शेल/डमी कंपनियों के नेटवर्क के जरिए छिपाया गया, अपने पास रखा गया, हासिल किया गया, इस्तेमाल किया गया और साफ-सुथरी संपत्ति के तौर पर दिखाया गया। प्राइमरी टीचर भर्ती घोटाले से जुड़े एक मामले में अर्पिता मुखर्जी के ठिकानों पर तलाशी के दौरान, लगभग 49.80 करोड़ रुपए नकद और लगभग 5.08 करोड़ रुपए कीमत का सोना और गहने जब्त किए गए।

जांच से पता चला कि अर्पिता मुखर्जी अवैध फंड की कस्टोडियन (रखवाली करने वाली) के तौर पर काम करती थीं और उन्हें कई शेल और डमी कंपनियों में डायरेक्टर/शेयरहोल्डर बनाया गया था, जिनका इस्तेमाल अवैध कमाई को रखने और उसे इधर-उधर घुमाने के लिए किया जाता था। इसके अलावा, भर्ती घोटाले से मिले फंड का इस्तेमाल करके आरोपी व्यक्तियों और उनके सहयोगियों से जुड़ी कंपनियों के जरिए कई अचल संपत्तियां खरीदी गईं।

ईडी ने अब तक एसएससी ग्रुप-सी और ग्रुप-डी भर्ती घोटाले में लगभग 247.35 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की है। ईडी ने अब तक एसएससी और प्राइमरी टीचर से जुड़े भर्ती घोटाले के मामलों में 702 करोड़ रुपए से ज्यादा की अवैध कमाई जब्त की है।

इसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 3 अप्रैल 2025 को दिए अपने फैसले में कहा कि वेस्ट बंगाल सेंट्रल स्कूल सर्विस कमीशन द्वारा की गई भर्ती प्रक्रिया धोखाधड़ी से दूषित थी, और इसी के साथ कोर्ट ने 25,000 से ज्यादा टीचरों और कर्मचारियों की नियुक्तियां रद्द कर दीं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों का भी जिक्र किया, जिसमें ओएमआर स्कोर में हेरफेर, रैंक जंपिंग, और गैर-कानूनी नियुक्तियां शामिल थीं।