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‘आप’ विधायक को गुजरात हाई कोर्ट से राहत, विधानसभा सत्र में हिस्सा लेने के लिए 7 दिन की मिली अंतरिम जमानत

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अहमदाबाद, 7 सितंबर (आईएएनएस)। गुजरात हाई कोर्ट ने सोमवार को आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक चैतर वसावा को सात दिन की अंतरिम जमानत दे दी, ताकि वह विधानसभा के मानसून सत्र में शामिल हो सकें। यह सत्र 9 से 11 सितंबर तक होना है।

डेडियापाडा (एसटी) निर्वाचन क्षेत्र के विधायक वसावा अभी वडोदरा सेंट्रल जेल में बंद हैं। जून में राजपीपला सेशन कोर्ट ने उन्हें, उनकी पत्नी शकुंतला और सात अन्य लोगों को 2023 के एक मामले में सात साल की कड़ी सजा और हर एक पर 25,000 रुपए का जुर्माना लगाया था।

यह मामला वन अधिकारियों पर हमले और कथित तौर पर जबरन वसूली से जुड़ा था। यह अस्थायी जमानत वसावा की रिहाई के समय से सात दिनों तक लागू रहेगी। हाई कोर्ट ने कुछ शर्तें भी रखी हैं, जैसे कि उन्हें गांधीनगर में ही रहना होगा और जमानत की अवधि के दौरान जनता या मीडिया से बात नहीं कर सकेंगे।

अस्थायी जमानत खत्म होने के बाद उनके वापस जेल जाने की उम्मीद है। गुजरात ‘आप’ अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने कहा कि विधानसभा सत्र को देखते हुए वसावा को अस्थायी जमानत दी गई है।

उन्होंने कहा, “मेरे विधायक, सम्मानित चैतर वसावा, जेल में हैं, जबकि विधानसभा सत्र चल रहा है। इसे देखते हुए, हाई कोर्ट ने चैतरभाई को कुछ शर्तों के साथ सात दिन की अस्थायी जमानत दी है।”

गढ़वी ने कहा कि वसावा गांधीनगर में ही रहेंगे और उन्हें पाबंदियों का पालन करना होगा, जिसमें मीडिया से बात करने पर रोक भी शामिल है।

अभियोजन पक्ष का मामला 30 अक्टूबर 2023 की एक घटना से जुड़ा है, जब वन अधिकारियों ने कथित तौर पर डेडियापाडा के बोगज गांव के पास सरकारी जमीन पर उगाई गई फसल हटा दी थी।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, इसके बाद अधिकारियों को वसावा के घर बुलाया गया, जहां उन्होंने कथित तौर पर उन्हें धमकाया, एक अधिकारी को थप्पड़ मारा और हवाई फायरिंग की। उनकी पत्नी पर अधिकारियों से 60,000 रुपए जबरन वसूलने का आरोप था।

इन आरोपों में दंगा करना, सरकारी कर्मचारी पर हमला, जबरन वसूली और आर्म्स एक्ट के तहत अपराध शामिल थे। वसावा के वकीलों ने हथियार वाले आरोप को गलत बताया है और कहा है कि मामले में कोई हथियार या बैलिस्टिक रिपोर्ट पेश नहीं की गई थी।

हाई कोर्ट ने 24 अगस्त को वसावा की नियमित जमानत और सजा पर रोक लगाने की याचिका खारिज कर दी थी।

वसावा को अभी तक औपचारिक रूप से विधायक पद के लिए अयोग्य नहीं ठहराया गया है।

राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि वसावा को विधानसभा सत्र में शामिल होने का निमंत्रण विधायिका के नियमों के अनुसार ही भेजा गया था।