नई दिल्ली, 26 सितंबर (आईएएनएस)। चुनाव आयोग की बैठक और फॉर्म-6 में किए गए बदलाव को लेकर कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने जुबानी हमला किया। उन्होंने कहा कि 23 सितंबर को सामने आए फॉर्म-6 से जुड़े मुद्दे पर चुनाव आयोग ने अभी तक मूल सवाल का जवाब नहीं दिया है। फॉर्म-6 एक वैधानिक फॉर्म है और इसमें बदलाव के लिए संबंधित नियमों में संशोधन जरूरी है। ऐसा संशोधन संसद के जरिए नहीं किया गया, इसलिए फॉर्म-6 में किया गया बदलाव गैरकानूनी है।
पवन खेड़ा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि इसी आधार पर एसआईआर की प्रक्रिया, मतदाताओं के नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठते हैं। यदि फॉर्म-6 में बदलाव ही वैध नहीं था तो उसके आधार पर हुई एसआईआर की प्रक्रिया भी गैरकानूनी है। इसका सीधा असर बिहार और बंगाल के चुनावों पर पड़ता है और वहां के जनादेश को लेकर भी सवाल खड़े होते हैं। फॉर्म-6 में बदलाव ही इस पूरे विवाद का मूल मुद्दा है। चुनाव आयोग की ओर से नई कमेटी बनाने या उसमें डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर, आईआईटी और आईआईएम से जुड़े लोगों को शामिल करने की बात कही जा रही है, लेकिन इससे मूल समस्या का समाधान नहीं होगा। ईसीआई-एनईटी के जरिए मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया के केंद्रीकरण को लेकर भी सवाल हैं। पहले स्थानीय स्तर पर ईआरओ काम करते थे और उन्हें अपने क्षेत्र के मतदाताओं की स्थानीय जानकारी होती थी। अब यह प्रक्रिया केंद्रीय स्तर पर होने से पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
उन्होंने गोवा में 97 मतदाताओं से जुड़े मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इनमें से 82 मामलों को दबाव के बाद दुरुस्त किए जाने की बात कही गई है। कांग्रेस सांसद ने सवाल उठाया कि अगर 97 मतदाताओं का मामला सामने आने पर सुधार किया गया तो पूरे देश में ऐसे कितने मामले होंगे। गोवा का मामला मीडिया में आने के कारण सामने आया, लेकिन देश के दूसरे हिस्सों में मतदाता सूची से जुड़े मामलों का क्या होगा, इसका जवाब भी चुनाव आयोग को देना चाहिए।
युवा मतदाताओं से जुड़े मुद्दे का उल्लेख करते हुए उन्होंने चुनाव आयोग की ओर से कॉलेजों में जाकर काउंटर लगाने की बात पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर ऐसी व्यवस्था पहले से होती तो युवाओं को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। किसी भी मतदाता को वीआईपी और नॉन-वीआईपी की श्रेणी में बांटना संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है। चुनाव आयोग से इस पूरे मामले पर जवाब देना चाहिए।
कांग्रेस के लगातार ‘वोट चोरी’ का मुद्दा उठाने और राहुल गांधी के हालिया एक्स पोस्ट के बाद पार्टी के अगले कदम को लेकर पूछे गए सवाल पर पवन खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस पिछले दो वर्षों से इस मुद्दे को उठा रही है और आगे भी अपने कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ेगी। चुनाव आयोग अब दबाव में कुछ कदम उठाकर मामले को संभालने की कोशिश कर रहा है, लेकिन विपक्ष अपना अभियान जारी रखेगा। विपक्ष देश की करीब 60 प्रतिशत जनता का प्रतिनिधित्व करता है और सवाल उठाया कि क्या सरकार यह सोचती है कि इतने बड़े हिस्से की जनता बिना प्रतिनिधित्व के बैठी है।
दिल्ली में होने वाली इंडिया गठबंधन की संभावित बैठक को लेकर पवन खेड़ा ने कहा कि इसकी पूरी जानकारी सही समय पर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि फॉर्म-6 और चुनाव आयोग से जुड़ा मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण है और अब यह मामला काफी बड़ा हो चुका है। इस मुद्दे पर अलग-अलग राजनीतिक दलों और एनडीए के कुछ नेताओं से भी बातचीत हो रही है। चिराग पासवान समेत कई नेताओं की ओर से इस मुद्दे पर आवाज उठाई गई है और चंद्रबाबू नायडू की पार्टी से भी आवाजें सामने आने लगी हैं। अब यह मामला सिर्फ विपक्ष तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसे लेकर व्यापक स्तर पर सवाल उठने लगे हैं। यह मुद्दा इतना बड़ा हो चुका है कि अब इसे आसानी से नहीं संभाला जा सकता।
