SGSU Advertisement
Home अंतर्राष्ट्रीय पाकिस्तान: भीड़ के हमलों और ईशनिंदा के आरोपों के बाद ईसाई परिवारों...

पाकिस्तान: भीड़ के हमलों और ईशनिंदा के आरोपों के बाद ईसाई परिवारों में दहशत

0
7

इस्लामाबाद, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक ईसाई व्यक्ति पर ईशनिंदा का आरोप लगने के बाद मुस्लिम भीड़ ने उसके घर और दुकान में आग लगा दी। एक रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद और अधिक हिंसा के डर से 35 से ज्यादा ईसाई परिवारों को अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।

घटना से एक दिन पहले पुलिस ने पंजाब के घड़ियाल कलां गांव में एक छोटी सी फार्मेसी चलाने वाले 40 वर्षीय ईसाई व्यक्ति, कामरान मसीह को गिरफ्तार किया। ‘क्रिश्चियन डेली इंटरनेशनल’ ने एक सूत्र के हवाले से बताया कि स्थानीय मुसलमानों ने उस पर व्हाट्सएप ग्रुप में ईशनिंदा (धार्मिक अपमान) से जुड़ा एक वीडियो साझा करने का आरोप लगाया था।

‘क्रिश्चियन डेली इंटरनेशनल-मॉर्निंग स्टार न्यूज’ ने नाम न छापने की शर्त पर उस सूत्र के हवाले से बताया, “जैसे ही मसीह की गिरफ्तारी की खबर फैली, भीड़ के हमले के डर से उनका परिवार और अन्य ईसाई गांव छोड़कर भागने लगे।”

सूत्र ने बताया कि कई मुसलमान मसीह की दुकान और उनके घर के पास इकट्ठा हो गए, विरोध प्रदर्शन किया और दोनों इमारतों में आग लगा दी।

‘क्रिश्चियन डेली इंटरनेशनल’ की रिपोर्ट के अनुसार, मानवाधिकार संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने पाकिस्तान के ईशनिंदा कानूनों की आलोचना की है। उनका कहना है कि इन कानूनों का इस्तेमाल निजी विवादों और अन्य झगड़ों में आसानी से किया जा सकता है, और इनका सबसे बुरा असर धार्मिक अल्पसंख्यकों पर पड़ा है।

22 जुलाई को एक प्रमुख अल्पसंख्यक समूह ने पाकिस्तान पर ईशनिंदा कानूनों के दुरुपयोग को रोकने में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने झूठे आरोपों, आरोपियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर भीड़ की हिंसा, और अल्पसंख्यकों को इन घटनाओं के नतीजों से बचाने में नाकामी का हवाला दिया।

‘वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी’ (वीओपीएम) के अनुसार, पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून सबसे ‘विवादास्पद मुद्दों’ में से एक हैं। इनका धार्मिक अल्पसंख्यकों पर गहरा असर पड़ता है और सरकारी संस्थाएं इनके दुरुपयोग को रोकने में लगातार विफल रही हैं।

इस मानवाधिकार संगठन ने कहा कि पाकिस्तान की न्याय प्रणाली की सबसे बड़ी विफलताओं में से एक यह है कि वह निर्दोष लोगों को झूठे आरोपों से नहीं बचा पाती।

‘वीओपीएम’ ने डाउन सिंड्रोम से पीड़ित पाकिस्तानी ईसाई लड़की, रिमशा मसीह के मामले का जिक्र करते हुए कहा कि इस घटना ने सिस्टम की गंभीर कमियों को उजागर कर दिया। उस पर कुरान के अपमान का आरोप लगाया गया था, लेकिन बाद में मिले सबूतों से पता चला कि ये आरोप गढ़े गए थे।

हालांकि, बाद में उसे रिहा कर दिया गया, लेकिन मानवाधिकार संगठन का कहना है कि तब तक काफी नुकसान हो चुका था। उसके परिवार को भारी दबाव का सामना करना पड़ा। यह मामला दिखाता है कि अदालत द्वारा तथ्यों की जांच करने से पहले ही, कोई व्यक्ति कितनी आसानी से इस तरह के आरोपों का शिकार बन सकता है।

वीओपीएम ने कहा, “न्यायपालिका और कानून लागू करने वाली एजेंसियों की बार-बार आलोचना की गई है, क्योंकि वे ईशनिंदा के आरोपों का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने में विफल रही हैं। जब झूठे आरोप लगाने वालों या धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने वालों को जवाबदेह नहीं ठहराया जाता तो इससे एक खतरनाक संदेश जाता है कि ऐसी हरकतें बिना किसी परिणाम के जारी रह सकती हैं। जवाबदेही की यह कमी कानूनी प्रणाली में जनता के भरोसे को कमजोर करती है।”