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बिहार के आजीविका मॉडल पर राष्ट्रीय मंथन, गरीबी उन्मूलन की रणनीति को मिलेगी नई दिशा

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पटना, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। बिहार में अत्यंत गरीब परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित सतत जीविकोपार्जन योजना के अनुभवों और प्रभावों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ग्रामीण विकास की नीतियों के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है।

शुक्रवार को जे-पाल साउथ एशिया और जीविका के संयुक्त प्रयासों से आयोजित कार्यक्रम में योजना के क्रियान्वयन, मूल्यांकन, पिछले एक दशक की उपलब्धियों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव रोहित कंसल, बिहार सरकार के मंत्रिमंडल सचिवालय विकास विभाग के सचिव अरविंद कुमार चौधरी, ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव एचआर श्रीनिवास, योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी समेत केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी हिमांशु शर्मा सहित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और विकास क्षेत्र से जुड़े संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत जे-पाल साउथ एशिया की कार्यकारी निदेशक शोभिनी मुखर्जी के उद्घाटन संबोधन से हुई।

उन्होंने योजना के मूल्यांकन, उससे प्राप्त साक्ष्यों और अनुभवों को नीतिगत निर्णयों में इस्तेमाल करने के महत्व पर प्रकाश डाला। जीविका की अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी अनन्या सिंह ने योजना के मॉडल, कार्यप्रणाली और उपलब्धियों की जानकारी दी।

इस दौरान योजना पर आधारित एक लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई। ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव एचआर श्रीनिवास ने ग्रामीण विकास में योजना की भूमिका को रेखांकित किया। वहीं, योजना के मूल्यांकन पर आयोजित सत्र में डॉ. एमआर शरण, डॉ. ज्योति मुखोपाध्याय और डॉ. शगुन सबरवाल ने इसके प्रभावों और विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने से जुड़े पहलुओं पर चर्चा की।

इस दौरान उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर योजना को अधिक प्रभावी बनाने के उपायों पर भी विचार किया गया। योजना के दीर्घकालिक प्रभाव, विस्तार और निरंतर सुधार में नीतिगत विकल्पों तथा संस्थागत नेतृत्व की भूमिका पर भी विमर्श हुआ। इस सत्र में कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव बालामुरुगन डी., एनबीपीडीसीएल के प्रबंध निदेशक राहुल कुमार और जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी हिमांशु शर्मा ने अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम में योजना की पिछले एक दशक की यात्रा, प्रमुख उपलब्धियों और विभिन्न संस्थाओं के योगदान पर भी चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त, समावेशी आजीविका योजना के राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य पर ग्रामीण विकास मंत्रालय की उप सचिव डॉ. मोनिका ने संबोधन दिया। मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की प्रोफेसर, जे-पाल की सह-संस्थापक और नोबेल पुरस्कार से सम्मानित एस्थर डुफ्लो ने अत्यधिक गरीबी उन्मूलन में ग्रेजुएशन अप्रोच की भूमिका पर वैश्विक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।

वहीं, ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव रोहित कंसल ने ग्रामीण विकास में नवाचार और प्रभावी समाधान तैयार करने के लिए साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया।कार्यक्रम का मुख्य संदेश ‘बिहार से भारत तक’ सतत जीविकोपार्जन योजना के अनुभवों और साक्ष्यों को व्यापक ग्रामीण विकास की नीतियों से जोड़ना रहा।

बिहार में पिछले एक दशक के दौरान विकसित इस मॉडल के क्रियान्वयन, मूल्यांकन और उससे मिली सीख पर चर्चा करते हुए यह समझने का प्रयास किया गया कि अत्यंत गरीब परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अपनाए गए प्रभावी तरीकों को राष्ट्रीय स्तर पर किस तरह उपयोगी बनाया जा सकता है। जे-पाल साउथ एशिया, जीविका, केंद्र और बिहार सरकार के अधिकारियों तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की भागीदारी वाले इस विमर्श में साक्ष्य आधारित नीतियों, संस्थागत सहयोग और निरंतर नवाचार के जरिए ग्रामीण आजीविका कार्यक्रमों को अधिक प्रभावशाली बनाने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम के समापन पर अनन्या सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया।