SGSU Advertisement
Home कानून कांग्रेस की रैली के लिए जगह तय करने पर एनएसयूआई अध्यक्ष रौनक...

कांग्रेस की रैली के लिए जगह तय करने पर एनएसयूआई अध्यक्ष रौनक खत्री और दीपांशु शौकीन ने उठाए सवाल

0
4

नई दिल्ली, 18 अक्टूबर (आईएएनएस)। दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को होने वाली कांग्रेस की रैली को लेकर एनएसयूआई अध्यक्ष रौनक खत्री और दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के उपाध्यक्ष दीपांशु शौकीन ने विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थान पर सवाल उठाए हैं। दोनों छात्र नेताओं ने आरोप लगाया है कि विरोध प्रदर्शनों के लिए स्थान सीमित करने से लोकतांत्रिक आवाजों को कमजोर किया जा सकता है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि युवाओं को अपनी मांगें खुलकर रखने और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने का अवसर दिया जाए।

दिल्ली पुलिस की ओर से रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली आयोजित करने की अनुमति दिए जाने के बाद छात्र नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने प्रदर्शन के लिए स्थान निर्धारित किए जाने और विरोध प्रदर्शनों पर लगाई जाने वाली पाबंदियों को लेकर चिंता जताई।

एनएसयूआई अध्यक्ष रौनक खत्री ने कहा कि यह विडंबना है कि देश के नागरिकों को अपने ही देश में किसी मैदान में जाकर सभा करने या प्रदर्शन करने के लिए अनुमति लेनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि जिस तरह का प्रदर्शन जंतर-मंतर पर होना चाहिए था, उसके लिए अब रामलीला मैदान में भी अनुमति की आवश्यकता पड़ रही है।

खत्री ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा, “ऐसी बदकिस्मती तो अंग्रेजों के जमाने में भी नहीं थी, जो आज हम भारत सरकार और भाजपा के शासन में देख रहे हैं।” वहीं, दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के उपाध्यक्ष दीपांशु शौकीन ने भी विरोध प्रदर्शन के लिए सीमित अवसर उपलब्ध कराए जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए चिंताजनक बताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक को अपनी आवाज उठाने का अधिकार है।

शौकीन ने कहा, “अगर इस देश के युवाओं को अपनी बात रखने का मौका भी नहीं दिया जा रहा है, तो आप समझ सकते हैं कि इस देश में लोकतंत्र किस हद तक गिर चुका है। यह लोकतंत्र की सीधी हत्या है।” उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में हो रही गिरफ्तारियां पूरी तरह गलत हैं। हालांकि, उपलब्ध बयान में उन्होंने गिरफ्तारियों से संबंधित विशिष्ट मामलों या आरोपों का विस्तृत विवरण नहीं दिया।

दोनों छात्र नेताओं ने युवाओं को अपनी मांगें रखने का अवसर देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना है कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन और असहमति के लिए पर्याप्त जगह होनी चाहिए, ताकि युवा अपनी समस्याओं और मांगों को सार्वजनिक रूप से उठा सकें।