ग्रेटर नोएडा, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने शहर की हवा को स्वच्छ रखने और प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए अपनी मुहिम तेज कर दी है। ग्रेटर नोएडा में धूल उड़ने से रोकने, निर्माण स्थलों पर निगरानी रखने, सड़कों की सफाई करने और कूड़ा जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए व्यापक स्तर पर इंतजाम किए गए हैं। इसके लिए पूरे शहर को 21 जोन में बांटकर अधिकारियों और कर्मचारियों की टीमें तैनात की गई हैं।
वहीं, निर्माण स्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर एंटी स्मॉग गन, वाटर टैंकर तथा मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनों की मदद से प्रदूषण नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एनजी रवि कुमार ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए सभी आवश्यक उपाय सुनिश्चित किए जाएं। ग्रैप (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान) के नियमों को ध्यान में रखते हुए प्राधिकरण का परियोजना विभाग, स्वास्थ्य विभाग, उद्यान विभाग और अन्य संबंधित विभाग लगातार काम कर रहे हैं। प्रदूषण पर प्रभावी निगरानी और नियंत्रण के लिए ग्रेटर नोएडा को 21 जोन में विभाजित किया गया है।
प्रत्येक जोन में वरिष्ठ प्रबंधक स्तर के अधिकारी को जोनल अधिकारी और प्रबंधक स्तर के अधिकारी को सहायक जोनल अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सभी वर्क सर्किल को भी जोनवार जिम्मेदारियां दी गई हैं, ताकि शहर के अलग-अलग हिस्सों में नियमित निगरानी की जा सके। तैनात टीमें अपने-अपने क्षेत्रों में धूल, गंदगी और कूड़े के ढेर की स्थिति पर नजर रखेंगी। जहां सफाई व्यवस्था में लापरवाही मिलेगी, वहां संबंधित वेंडर को सूचना देकर कूड़ा उठवाने और सफाई सुनिश्चित कराने की कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा सड़कों पर धूल उड़ने से रोकने के लिए पानी का छिड़काव किया जाएगा। टीमें अपने क्षेत्रों में कूड़ा जलाने की घटनाओं पर भी नजर रखेंगी।
प्राधिकरण के महाप्रबंधक परियोजना एके सिंह और उप महाप्रबंधक परियोजना विजय रावल भी शहर के विभिन्न क्षेत्रों का लगातार निरीक्षण कर रहे हैं, ताकि प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए जा रहे इंतजामों की स्थिति का जायजा लिया जा सके।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के उप महाप्रबंधक विजय रावल ने बताया कि निर्माण स्थलों पर धूल को नियंत्रित करने के लिए 216 एंटी स्मॉग गन लगाई गई हैं। इसके अतिरिक्त प्राधिकरण की आठ एंटी स्मॉग गन का इस्तेमाल सार्वजनिक स्थलों पर किया जा रहा है। इस तरह कुल 224 एंटी स्मॉग गन के माध्यम से धूल को हवा में फैलने से रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं। इन व्यवस्थाओं में एसटीपी से शोधित पानी का भी इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ पानी का उपयोग भी बेहतर तरीके से हो सके।
निर्माण स्थलों पर धूल उड़ने से आसपास के क्षेत्रों की वायु गुणवत्ता प्रभावित होती है। ऐसे में एंटी स्मॉग गन और पानी के छिड़काव को प्रदूषण नियंत्रण अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। शहर में धूल को नियंत्रित करने के लिए 107 वाटर टैंकरों से सड़कों पर पानी का छिड़काव किया जा रहा है। इसके साथ ही पेड़ों पर जमी धूल को साफ करने के लिए भी टैंकरों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
प्राधिकरण का प्रयास है कि सड़कों और खुले स्थानों पर जमा धूल दोबारा हवा में न उड़े, जिससे प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित रखने में मदद मिल सके। इसके अतिरिक्त सड़कों की सफाई के लिए 11 मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनें लगाई गई हैं। इन मशीनों के माध्यम से प्रमुख सड़कों और अन्य निर्धारित स्थानों पर सफाई कराई जा रही है।
प्राधिकरण के अनुसार, सफाई व्यवस्था को मजबूत करने और धूल के कणों को कम करने के लिए नियमित रूप से इन संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रदूषण फैलाने वाले लोगों और संस्थाओं के खिलाफ भी प्राधिकरण की टीमें निगरानी कर रही हैं। कूड़ा उठाने में लापरवाही करने वाले वेंडरों के साथ-साथ खुले में कूड़ा जलाने वालों पर भी नजर रखी जा रही है। प्राधिकरण का उद्देश्य है कि शहर में कूड़े के ढेर न लगें और उन्हें जलाने से निकलने वाला धुआं वायु गुणवत्ता को और खराब न करे।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के महाप्रबंधक एके सिंह ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं भी कूड़ा जलता हुआ दिखाई दे तो इसकी सूचना तत्काल प्राधिकरण को दें। इसके लिए प्राधिकरण के कॉल सेंटर नंबर 0120-2336046, 0120-2336047, 0120-2336048 और 0120-2336049 पर संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा मित्रा ऐप के माध्यम से भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। प्राधिकरण ने शहरवासियों से स्वच्छता अभियान में सहयोग करने और खुले में कूड़ा नहीं जलाने की अपील की है।
अधिकारियों का कहना है कि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए प्रशासनिक प्रयासों के साथ नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है। शहर में चलाए जा रहे इस अभियान के तहत निगरानी, सफाई और धूल नियंत्रण के उपाय लगातार जारी रखे जाएंगे।
