नई दिल्ली, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ की मांग को लेकर पिछले 14-15 दिनों से चल रहा छात्रों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा सभी गेट बंद करने के आदेश के बाद छात्र आक्रोशित हैं। छात्रों का कहना है कि प्रशासन डरा हुआ है और आंदोलन को हिंसक तरीके से दबाने की कोशिश कर रहा है, भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों को हटाया जा रहा है।
छात्रों ने तीन मांगें रखी हैं, छात्र संघ बहाल किया जाए, प्रदर्शनकारियों पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएं और प्रॉक्टर इस्तीफा दें। वहीं, छात्रों का कहना है कि इब्न सीना लाइब्रेरी रात 2 बजे तक खुलती है, कई छात्र 7-7 लोग एक कमरे में रहते हैं, ऐसे में गेट बंद होने से उनकी पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित होगी।
जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में प्रदर्शन कर रहे एक छात्र ने कहा, “हमारी रणनीति शुरू से ही स्पष्ट रही है। हम पिछले 14-15 दिनों से यहां प्रदर्शन कर रहे हैं और छात्र भूख हड़ताल पर हैं। हमारी सिर्फ एक ही मांग है, हम छात्र संघ चाहते हैं। हम इसी मांग को लेकर अपना प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं और हमारी रणनीति स्पष्ट है कि जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होतीं और हमें छात्र संघ नहीं मिल जाता, हम यहां से नहीं जाएंगे।”
एक छात्र ने कहा कि वे हमारे पूरे प्रदर्शन स्थल को हटाने और हमें यहां से बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं। वे कैंपस के अंदर हिंसक माहौल बना रहे हैं, लेकिन हम डटे हुए हैं। हम अपनी मांगें पूरी करने के लिए कह रहे हैं। बस हमें यूनियन दे दीजिए। देखिए कैसे वे अभी छात्रों को घसीट रहे हैं।
एक अन्य छात्र ने कहा कि हमारी तीन मांगें बिल्कुल स्पष्ट हैं। पहली मांग छात्र संघ की है, दूसरी मांग है कि प्रदर्शनकारियों पर लगाए गए सभी प्रतिबंधों को हटाया जाए, तीसरी मांग प्रॉक्टर के इस्तीफे की है। इससे अधिक शांतिपूर्ण प्रदर्शन नहीं हो सकता, ये तो भूख हड़ताल पर बैठे थे। बहुत ही हिंसक तरीके से इसे दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि दिक्कत यह है कि इतने सारे पुलिसकर्मियों को यहां बुलाकर, सिक्योरिटी गार्ड को बुलाकर, हमें यहां से हटाने की कोशिश की जा रही है। पहले भी ऐसा किया था, बच्चों को जबरन हटाया था।
एक छात्र ने कहा कि वे हमारे पूरे प्रदर्शन स्थल को हटाने और हमें यहां से बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं। वे कैंपस के अंदर हिंसक माहौल बना रहे हैं, लेकिन हम डटे हुए हैं। हम अपनी मांगें पूरी करने की मांग कर रहे हैं। बस हमें यूनियन दे दीजिए। देखिए कैसे वे अभी छात्रों को घसीट रहे हैं।
जामिया मिलिया इस्लामिया के सभी गेट बंद करने के आदेश पर एक छात्र ने कहा, “मेरा मानना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन काफी दबाव में है। आज भी कई छात्र आसपास के इलाकों में इसलिए रहते हैं ताकि वे रात में लाइब्रेरी में पढ़ाई कर सकें। इब्न सीना लाइब्रेरी रात 2 बजे तक खुली रहती है और छात्र देर रात तक वहां पढ़ते हैं। मुझे लगता है कि इस फैसले से उनकी पढ़ाई पर असर पड़ेगा। कई छात्र एक ही कमरे में रहते हैं, इसलिए लाइब्रेरी ही उनकी पढ़ाई की मुख्य जगह है। अगर विश्वविद्यालय के गेट बंद कर दिए गए तो छात्रों के लिए मुश्किलें खड़ी हो जाएंगी।”
एक छात्र ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन पूरी तरह से डरा हुआ है और हमारी मांगों को दबाने की कोशिश कर रहा है। हम रोज यहां रीडिंग हॉल में पढ़ने आते हैं क्योंकि हम साझा कमरों में रहते हैं, जहां पढ़ाई करना मुश्किल है। हमारी सारी क्लासेज ऑनलाइन कर दी गई हैं। ऐसा लगता है कि प्रशासन चाहता है कि छात्र विश्वविद्यालय से दूर रहें ताकि हमारी मांगें अधूरी रह जाएं।”
एक अन्य छात्र ने कहा कि मेरा मानना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन काफी दबाव में है। आज भी कई छात्र आसपास के इलाकों में इसलिए रहते हैं, ताकि वे रात में लाइब्रेरी में पढ़ सकें। इब्न-ए-सीना लाइब्रेरी रात 2 बजे तक खुली रहती है और छात्र देर रात तक वहां पढ़ाई करते हैं। इस फैसले से उनकी पढ़ाई पर असर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि कई छात्र एक ही कमरे में साथ रहते हैं, एक कमरे में सात-सात लोग तक रहते हैं, इसलिए लाइब्रेरी ही उनकी पढ़ाई की मुख्य जगह है। अगर विश्वविद्यालय के गेट बंद कर दिए गए तो छात्रों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
