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भोपाल: शराब ठेके में फर्जी एफडीआर लगाने के मामले में लोकायुक्त पुलिस ने दर्ज की एफआईआर

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भोपाल, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। भोपाल में शराब ठेके के लिए 2.75 करोड़ रुपए की फर्जी एफडीआर (फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद) लगाने के मामले में लोकायुक्त पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज कर ली है। इस मामले में तत्कालीन सहायक आबकारी आयुक्त दीपम रायचूरा और हरियाणा के शराब ठेकेदार जसवंत सिंह को नामजद आरोपी बनाया गया है।

लोकायुक्त पुलिस ने दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

लोकायुक्त डीएसपी वीरेंद्र सिंह फर्जी एफडीआर से जुड़ी खबरें सामने आने के बाद लोकायुक्त महानिदेशक योगेश देशमुख ने मामले का संज्ञान लिया था। प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद लोकायुक्त एसपी सुनील कुमार पाटीदार के निर्देश पर एफआईआर दर्ज की गई।

डीएसपी वीरेंद्र सिंह ने बताया कि ठेकेदार जसवंत सिंह ने वर्ष 2024-25 के लिए भोपाल के पीएंडटी चौराहा और डिपो चौराहा स्थित शराब दुकानों का ठेका लिया था। इन दोनों दुकानों की कुल कीमत लगभग 27 करोड़ 55 लाख रुपए थी।

नियमों के अनुसार ठेकेदार को कुल राशि का 10 प्रतिशत, यानी करीब 2 करोड़ 75 लाख रुपए सिक्योरिटी मनी के रूप में जमा करना था। आरोप है कि ठेकेदार ने तत्कालीन सहायक आबकारी आयुक्त दीपम रायचूरा के साथ मिलकर एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक की एक फर्जी ई-एफडीआर प्रस्तुत की और उसके सत्यापन से संबंधित दस्तावेज भी फर्जी तरीके से तैयार कर जमा कर दिए।

जांच के दौरान एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने ऐसी किसी भी एफडीआर को जारी करने से इनकार किया है। लोकायुक्त का कहना है कि यदि जांच में किसी बैंक अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

लोकायुक्त पुलिस ने भोपाल और ग्वालियर के आबकारी कार्यालयों से मामले से जुड़े मूल दस्तावेज मांगे हैं। अधिकारियों के मुताबिक दस्तावेज मिलने के बाद आरोपियों से पूछताछ की जाएगी और आवश्यक होने पर गिरफ्तारी की कार्रवाई भी की जाएगी।

लोकायुक्त अब इस मामले में अन्य सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों की संभावित भूमिका की भी जांच कर रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी एफडीआर तैयार करने और उसे वैध दिखाने के पीछे किन-किन लोगों की मिलीभगत थी।