मुंबई, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। महायुति में फूट और 500 करोड़ रुपए के कथित लेन-देन वाले वायरल ऑडियो क्लिप को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया। कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ ने कहा कि महाराष्ट्र सूखाड़, बेरोजगारी और महंगाई से जूझ रहा है, लेकिन सरकार सत्ता बचाने में व्यस्त है। उन्होंने मनोज जरांगे पाटील के जरिए सामने आए ऑडियो मामले में ईडी और एसीबी से स्वत: संज्ञान लेकर जांच की मांग की, साथ ही एमपीएससी की घटती विश्वसनीयता, पेपर लीक और छात्रों के आंदोलन पर भी सरकार को घेरा।
कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ ने कहा, “जिस तरह से एक-दूसरे के ऊपर लगातार इल्जाम पर इल्जाम लगाए जा रहे हैं, महायुति के दोनों घटकों द्वारा, और जिस तरह से हम देख रहे हैं कि सत्ता के लिए ये लोग साथ हैं, जबकि आज महाराष्ट्र की जनता के सामने सबसे बड़ी समस्या सूखाड़ की है, जिसके कारण किसान सबसे ज्यादा परेशान हैं। युवा बेरोजगारी और महंगाई से परेशान हैं, महिलाएं परेशान हैं। ऐसे समय में 500 करोड़ के लेन-देन की बात मनोज जरांगे पाटिल के माध्यम से आई। जो कथित ऑडियो क्लिप सामने आई, उसके बाद जो बयानबाजी चल रही है, उससे सबको पता चल रहा है कि दोनों में से किसी ने कुछ नहीं किया है। दोनों एक-दूसरे पर इल्जाम लगा रहे हैं, लेकिन दोनों सत्ता छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं।”
उन्होंने कहा कि हमारा कहना यह है कि आप सत्ता में साथ रहते हो और जिस तरह से इन लेन-देन की बात हुई है, तो इसकी जांच कहां है? ईडी को इसमें स्वयं पहल करके जांच करनी चाहिए। मुख्यमंत्री के पास जो गृह विभाग है, एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो) है, उसे भी इसकी जांच करनी चाहिए। जिनके ऊपर आरोप हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। जब 500 करोड़ के लेन-देन और किसी आंदोलन को बनाने-बिगाड़ने की बात हो रही है, तो उसकी पूरी जांच होनी चाहिए।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि मुझे ऐसा लगता है कि ईडी का इस्तेमाल सिर्फ विपक्ष के खिलाफ करना और बाद में उन्हें अपनी पार्टी में शामिल कर लेना, यह उचित नहीं है। यदि वास्तव में कोई लेन-देन हुआ है, तो उसकी जांच होनी चाहिए और सच्चाई जनता के सामने आनी चाहिए। एमपीएससी को लेकर मैं हमेशा कहती रही हूं कि उसकी विश्वसनीयता पर बहुत सारे सवाल पैदा हुए हैं। एक समय था जब किसी भी विभाग में भर्ती करनी होती थी, तो लोग एमपीएससी की तरफ भरोसे से देखते थे। लेकिन अब धीरे-धीरे उसकी विश्वसनीयता कम होती जा रही है।
उन्होंने कहा कि मैंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर भी कहा था कि इसकी विश्वसनीयता बचाइए। आज नीचे से लेकर ऊपर तक पैसों के लेन-देन के आरोप लग रहे हैं। पेपर लीक हो रहे हैं। कहीं न कहीं परीक्षाएं बार-बार स्थगित की जा रही हैं। इससे छात्र बेहद परेशान हैं। मुझे लगता है कि इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। अभी तो उन्हें लंबी छुट्टी पर भेजा गया है, लेकिन केवल लंबी छुट्टी देने से काम नहीं चलेगा। उन्हें पद से हटाया जाना चाहिए और पूरी जांच की जानी चाहिए।
वर्षा गायकवाड़ ने कहा कि यह रैली एक दिन की रैली है। सबसे पहले तो यह समझना चाहिए कि यह कार्यक्रम काफी पहले से घोषित किया जा चुका है। यह अभी अचानक घोषित नहीं हुआ है। पहले से तय था कि इस तारीख से इस तारीख तक यह कार्यक्रम चलेगा। कल से चौपाल शुरू होगी और उसके बाद 1 तारीख को हमारा बड़ा सम्मेलन होगा। हम किसी भी व्यापारी को नुकसान पहुंचाने का काम नहीं करेंगे। कांग्रेस ने कभी ऐसा काम नहीं किया है। इस रैली के माध्यम से हम देश की जनता की आवाज संसद तक और राष्ट्रपति तक पहुंचाना चाहते हैं। हम सर्वोच्च न्यायालय में भी अपील कर चुके हैं।
उन्होंने कहा कि यह जनता की आवाज है, जो दिल्ली से लेकर गांव-गांव तक जाएगी और बताएगी कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है। इसके माध्यम से लोगों के मूलभूत अधिकार, विशेषकर वोट देने के अधिकार, को प्रभावित किया जा रहा है।
