गांधीनगर, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स 2026 में गुजरात के खिलाड़ियों ने आठ मेडल जीते, जिनमें एक गोल्ड, दो सिल्वर और पांच ब्रॉन्ज रहे। इनमें सबसे खास उपलब्धि साबरकांठा की अंजना बंबडिया की रही, जिन्होंने महिलाओं की 400 मीटर टी47 स्पर्धा में 59.97 सेकंड का समय निकालकर गोल्ड जीता।
साबरकांठा की ही तेजलबेन डामोर ने महिलाओं की 400 मीटर टी12 स्पर्धा में 57.60 सेकंड का समय लेकर रजत मेडल जीता, और महिलाओं की 200 मीटर टी12 स्पर्धा में 25.23 सेकंड का समय निकालकर सिल्वर हासिल किया।
गांधीनगर की निमिषा ने टी47 लॉन्ग जंप स्पर्धा में 5.37 मीटर की दूरी तय करके सिल्वर मेडल जीता। भावनगर के राकेश भट्ट ने पुरुषों की 37 स्प्रिंट स्पर्धाओं में दो ब्रॉन्ज मेडल जीते। उन्होंने 100 मीटर दौड़ 11.50 सेकंड में और 200 मीटर दौड़ 23.64 सेकंड में पूरी करके तीसरा स्थान हासिल किया।
गुजरात के खिलाड़ियों ने पैरा टेबल टेनिस में भी दो ब्रॉन्ज मेडल जीते। मेहसाणा की भाविनाबेन पटेल और अहमदाबाद की सोनलबेन पटेल ने क्रमशः महिलाओं की सिंगल्स क्लास 4-5 और क्लास 3 स्पर्धाओं में तीसरा स्थान प्राप्त किया।
अर्जुन पुरस्कार विजेता भाविनाबेन पटेल, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं, उन्हें गुजरात सरकार से 2023 एशियन गेम्स में भाग लेने के लिए 5 लाख रुपये और 2024 पेरिस ओलंपिक के लिए 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिली थी।
इसके अलावा, चीन के हांगझोऊ में आयोजित एशियन गेम्स 2023 में मेडल जीतने पर उन्हें राज्य सरकार की ओर से 50 लाख रुपये का पुरस्कार भी दिया गया था। सोनलबेन को एशियन गेम्स 2023 में भाग लेने के लिए 5 लाख रुपये और 2024 में पेरिस ओलंपिक में हिस्सा लेने के लिए 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिली।
निमिषा को 2023 एशियन गेम्स में भाग लेने के लिए राज्य सरकार की ओर से 5 लाख रुपये दिए गए। इसके बाद, हांगझोऊ में आयोजित एशियन गेम्स 2023 की लॉन्ग जंप स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतने पर उन्हें 30 लाख रुपये मिले। भट्ट को भी एशियन गेम्स 2023 में भाग लेने के लिए 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई।
राज्य सरकार ने कहा कि यह समर्थन, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों का हिस्सा है।
जारी बयान में कहा गया, “गुजरात के पैरा-एथलीट्स का प्रदर्शन उनकी कड़ी मेहनत, प्रतिभा और दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। इससे दिव्यांग खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धी खेलों से जुड़ने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रेरणा मिल सकती है।”
