इस्लामाबाद, 29 अक्टूबर (आईएएनएस)। पाकिस्तान की एक आतंकवाद निरोधक अदालत ने गुरुवार को मानवाधिकार वकील इमान जैनब माजारी-हाजिर और उनके पति हादी अली चट्ठा को एक सुरक्षा उल्लंघन मामले में 10-10 साल की सजा सुनाई है।
स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला अक्टूबर 2024 में एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टीम के पाकिस्तान दौरे के दौरान कथित सुरक्षा लापरवाही से जुड़ा है।
यह मामला इस्लामाबाद के आबपारा पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। आरोप था कि दंपति ने राज्य के मामलों में हस्तक्षेप कर राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाला।
अदालत के आदेश के अनुसार, दोनों को पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 353 के तहत दो साल की कैद और 50 हजार पाकिस्तानी रुपए जुर्माना, जबकि धारा 186 के तहत एक साल की कैद और 50 हजार रुपए जुर्माना लगाया गया।
इसके अलावा, अदालत ने आतंकवाद निरोधक अधिनियम, 1997 के तहत दोनों को 10-10 साल की जेल और एक-एक लाख पाकिस्तानी रुपए का जुर्माना भी सुनाया।
अदालत ने आदेश दिया कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी, इसलिए दोनों को कुल 10 साल की कैद भुगतनी होगी।
दंपति के वकील ने अदालत से फैसले को टालने की मांग की थी। उनका कहना था कि इस मामले से जुड़ी याचिकाएं अभी पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट और इस्लामाबाद हाईकोर्ट में लंबित हैं।
वकील ऐमल मंडोखैल ने दलील दी कि जब तक उच्च अदालतों में लंबित याचिकाओं पर फैसला नहीं आ जाता, तब तक निचली अदालत को फैसला नहीं सुनाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि लंबित आवेदनों पर विचार किए जाने के दौरान अदालत कानूनी रूप से फैसला नहीं सुना सकती थी।
इमान और हादी ने अपने खिलाफ दर्ज मामले को “उत्पीड़न” करार दिया। उनका कहना है कि उन्हें उनके मानवाधिकार कार्य और कानूनी सेवाओं के कारण निशाना बनाया जा रहा है।
दोनों ने अदालत में दर्ज अपने बयानों में कहा कि मुकदमे में पेश किए गए सबूत उनके खिलाफ नहीं बल्कि सरकारी अधिकारियों और राज्य तंत्र के खिलाफ आरोपपत्र जैसे हैं।
उनका आरोप है कि सरकारी एजेंसियों ने हाशिए पर रहने वाले समुदायों, सड़क विक्रेताओं, झूठे ईशनिंदा मामलों का सामना कर रहे लोगों और जबरन लापता व्यक्तियों के लिए किए गए उनके कानूनी और मानवाधिकार कार्यों की वजह से उन्हें परेशान किया।
वकील दंपति ने अपने बयान में कहा, “हम राज्य द्वारा प्रताड़ित किए जा रहे कैदी हैं।”
इमान और हादी का मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में रहा है। कई मानवाधिकार संगठनों ने उनकी गिरफ्तारी और हिरासत पर चिंता जताई है।
पिछले महीने इंटरनेशनल फेडरेशन फॉर ह्यूमन राइट्स और वर्ल्ड ऑर्गनाइजेशन अगेंस्ट टॉर्चर समेत 15 अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने संयुक्त बयान जारी कर दोनों की लगातार हिरासत पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी।

